घर खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाले रियल एस्टेट डेवलपर्स पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI की जांच तेज हो गई है। CBI ने शुक्रवार को इस सिलसिले में 13वीं चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें ग्रेटर नोएडा की प्रमुख कंपनी रुद्रना बिल्डवेल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (Rudra Buildwell Projects Pvt. Ltd.) और उसके निदेशकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में आरोप है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने सरकारी कर्मचारियों तथा अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे आश्वासनों, भ्रामक प्रचार और लुभावने वादों के जरिए गुमराह किया गया। फ्लैट्स बुक कराने के नाम पर करोड़ों रुपये जमा कराए गए, लेकिन प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया गया और न ही पैसा वापस किया गया।
672 फ्लैट्स बेचे, लेकिन सपने चूर
CBI की जांच के अनुसार, रुद्रा बिल्डवेल ने नोएडा के सेक्टर-16 में ‘Kbnows Apartments’ प्रोजेक्ट के तहत 672 फ्लैट्स बेचे। खरीदारों को पजेशन का झांसा देकर भारी रकम वसूली गई, लेकिन कई फ्लैट्स पहले ही बेचे जा चुके थे या जानकारी छिपाई गई। बुकिंग रद्द करने पर रिफंड भी नहीं दिया गया। इससे सैकड़ों निर्दोष घर खरीदार आर्थिक संकट में फंस गए, जिन्होंने सपनों का घर बनाने के लिए अपनी जमा पूंजी लगा दी थी। चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि सरकारी कर्मचारियों ने प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन कर आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फंड्स का दुरुपयोग और हेराफेरी का आरोप भी लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 50 बिल्डर्स की जांच
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें NCR (खासकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा) के करीब 50 बिल्डर्स पर होमबायर्स फ्रॉड और बिल्डर-बैंक गठजोड़ की जांच हो रही है। CBI पहले ही कई अन्य कंपनियों जैसे रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन, ड्रीम प्रोकान, जेपी इंफ्राटेक, AVJ डेवलपर्स, शुभकामना बिल्डटेक, सीक्वल बिल्डकॉन आदि के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बिल्डर्स और वित्तीय संस्थानों के बीच साठगांठ पर गहरी चिंता जताई थी। कई होमबायर्स ने याचिकाएं दायर कर बताया कि सबवेंशन स्कीम के तहत दिए गए होम लोन में बिल्डर्स डिफॉल्ट कर गए, लेकिन बैंक खरीदारों से EMI वसूल रहे हैं, जबकि फ्लैट नहीं मिले।
प्रभावित खरीदारों की दुर्दशा
प्रभावित खरीदारों का कहना है कि वर्षों से फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन न तो घर मिला और न ही निवेश की वापसी। कई परिवारों की जिंदगी बर्बाद हो गई है। CBI की जांच में पाया गया कि बिल्डर ने 600 से अधिक फ्लैट खरीदारों से पैसे जमा कराए, लेकिन प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। CBI ने इस मामले में आगे की जांच जारी रखते हुए संबंधित आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस मुहिम से उम्मीद है कि हजारों ठगे गए होमबायर्स को न्याय मिलेगा और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी। यह खबर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और CBI की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है। प्रभावित खरीदार CBI या संबंधित अदालत से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

