सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या की साजिश रचने की आरोपी सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की वेकेशन बेंच ने मेघालय हाईकोर्ट के 29 जून के उस आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा गया था। हालांकि बेंच ने कहा कि चूंकि सोनम पहले ही जेल से रिहा होकर शिलॉन्ग में जमानत की शर्तों के तहत रह रही हैं, इसलिए इस स्तर पर उन्हें दोबारा जेल भेजने का अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा।
मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पैरवी करते हुए कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और तकनीकी आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। मेहता ने बताया कि यह एक पूर्व-नियोजित हत्या थी, जिसमें सोनम ने खुद अपने पति को पहाड़ी इलाके में ले जाकर हमले में हिस्सा लिया और शव को घाटी में फेंक दिया गया, जो दस दिन बाद बरामद हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी फरार होकर उत्तर प्रदेश में पकड़ी गई थी और उसकी पिछली जमानत अर्जियां भी खारिज हो चुकी हैं। मेहता ने हाईकोर्ट पर बीएनएसएस की एक “अस्तित्वहीन धारा 403” के आधार पर जमानत देने का आरोप भी लगाया। गौरतलब है कि सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी की शादी 12 मई 2025 को हुई थी, जिसके बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए थे। 23 मई 2025 को नोंगरियट के एक होमस्टे से चेकआउट करने के बाद दंपती लापता हो गए थे। कुछ ही समय बाद उनकी किराए की बाइक सोहरारिम के पास परित्यक्त हालत में मिली थी, और 2 जून 2025 को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के वेइसॉडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में बरामद हुआ था। राज्य सरकार ने मेघालय हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन बेंच ने फिलहाल राहत देने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई 2026 को तय की है, जब अदालत गर्मी की छुट्टियों के बाद फिर से खुलेगी।

