भारत सरकार ने पूर्व ईरानी सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हुसैन को चुना है। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था। राज्य समारोह के तहत अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज हो गई हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, अंतिम संस्कार की मुख्य समारोह 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होंगे, उसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में और 9 जुलाई को खामेनेई के गृहनगर मशहद में दफन किया जाएगा।
पबित्र मार्गरिटा कौन हैं?
पबित्र मार्गरिटा असम से राज्यसभा सांसद हैं और जून 2024 में मोदी मंत्रिमंडल 3.0 में विदेश राज्य मंत्री तथा वस्त्र राज्य मंत्री के रूप में शामिल हुए। वे भारत-ईरान संबंधों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इससे पहले अप्रैल 2026 में उन्होंने तेहरान के दिल्ली दूतावास में खामेनेई की 40वीं दिन की श्रद्धांजलि सभा (चेलुम) में भारत सरकार की ओर से भाग लिया था।
बिहार राज्यपाल सैयद अता हुसैन
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हुसैन मार्च 2026 में बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण कर चुके हैं। सेना में उच्च पदों पर रह चुके हुसैन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य भी रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व के संदेश के रूप में देखी जा रही है।
पृष्ठभूमि
आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत फरवरी 2026 में अमेरिका-इजराइल संघर्ष के दौरान हुई मानी जाती है। उनके निधन पर भारत ने तुरंत शोक व्यक्त किया था और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास में श्रद्धांजलि दी थी। ईरान ने पूरे देश में शोक की घोषणा की थी और अब देरी से अंतिम संस्कार समारोह आयोजित हो रहा है। भारत और ईरान के बीच रणनीतिक, ऊर्जा और व्यापार संबंध मजबूत हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह प्रतिनिधिमंडल भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” और बहुपक्षीय कूटनीति की दिशा में एक कदम है। खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में लंबे समय तक देश की विदेश नीति और आंतरिक मामलों पर गहरा प्रभाव रखते रहे। यह एक विकासमान खबर है। अधिक जानकारी और अपडेट के लिए भारत सरकार के आधिकारिक बयान का इंतजार है।

