डीसीपी साइबर ने पकड़ा नौकरी के झांसे में बेरोजगारों को ठगा गिरोह का मुख्य संचालक; म्यूल बैंक खाते, दो एटीएम कार्ड और मोबाइल बरामद

नोएडा साइबर क्राइम थाना की टीम ने वर्क‑फ्रॉम‑होम और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह के एक प्रमुख सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं, तथा शुरुआती जांच में उसके खिलाफ कई शिकायतें और सैकड़ों पीड़ितों के होने के संकेत मिले हैं।

घटना का खुलासा

पुलिस के अनुसार टीम प्रतिबिंब पोर्टल पर चिह्नित साइबर अपराधियों की तलाश कर रही थी, तभी मुखबिर की सूचना मिली कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला एक संदिग्ध सेक्टर‑23 गेट के पास एलिवेटेड रोड के नीचे अपनी कार में मौजूद है। मौके पर पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम प्रशांत श्रीवास्तव (36) निवासी पटना, बिहार और वर्तमान पता सुपरटेक इनको विलेज‑1, ग्रेनो वेस्ट बताया।

साक्ष्य व जाँच

तलाशी में उसके पास से एक मोबाइल और यूको व यूनियन बैंक के दो एटीएम कार्ड मिले। मोबाइल की प्रारंभिक जांच में वॉट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, नौकरी के ऑफर लेटर, ई‑मेल के स्क्रीनशॉट और उम्मीदवारों का डेटा मिला। रिकॉर्डिंग में नौकरी दिलाने और रजिस्ट्रेशन/प्रोसेसिंग फीस जमा कराने की बातचीत भी दर्ज है। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अब तक लगभग 70 से अधिक लोगों के साथ ठगी करने की बात कबूल की है और गिरोह के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर 25 शिकायतें दर्ज हैं। जांच से सामने आया है कि गिरोह द्वारा झारखंड से ऑपरेट किया जा रहा था और कॉल सेंटर के माध्यम से देशभर के बेरोजगारों को फंसा कर ठगी की जा रही थी।

गिरोह की कार्यप्रणाली

आरोपी ने स्वीकार किया कि वह और उसका साथी अमन अग्रवाल अलग‑अलग डोमेन पर फर्जी जॉब वेबसाइट बनाकर वर्क‑फ्रॉम‑होम व अन्य नौकरियों के आकर्षक विज्ञापन जारी करते थे। इन वेबसाइटों के कॉल‑सेंटर में काम करने वाली युवतियां नौकरी तलाश रहे लोगों से संपर्क कर उनका डेटा इकट्ठा करती थीं, जिसे अमन के पास भेजा जाता। फिर उम्मीदवारों को नौकरी का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर म्यूल बैंक खातों में रकम जमा करवाई जाती। खाते में राशि आते ही रकम एटीएम से निकाल ली जाती और शातिराना तरीके से हिस्से अलग‑अलग खातों में ट्रांसफर कर दिये जाते थे। आरोपी ने बताया कि झारखंड की रहने वाली नाज नाम की युवती उन्हें बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी; सिम साथी को पहुंचा देती और बैंक खाते व एटीएम कार्ड का इस्तेमाल आरोपी स्वयं करता था। नकदी निकालने के बाद वह आमतौर पर 50 प्रतिशत हिस्सा कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए अमन अग्रवाल तक भेज देता था।

स्थानीय ठिकानों पर शिकार

पुलिस ने बताया कि आरोपी नोएडा में सेक्टर‑18, सेक्टर‑23, मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप के आसपास युवाओं से मोबाइल पर संपर्क कर या सीधे खड़े होकर नौकरी दिलाने का झांसा देता था। उसके पास एक फ्लैट (पफ्लैट) भी था, जहां वह लड़कों‑लड़कियों से बातचीत कर उन्हें फर्जी प्रक्रियाओं के लिए पैसे जमा कराने के लिए राजी करता था। रकम लेने के बाद आरोपी पीड़ितों के मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देता था। शिकायत दर्ज होने की आशंका से खाते, सिम और मोबाइल कुछ समय बाद बदल दिए जाते थे।

लक्ष्य और प्रभाव

पुलिस के अनुसार म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम लेने, भेजने और निकालने के लिए किया जाता है। ऐसे गिरोह बेरोजगार युवक, मजदूर, छात्र, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं। शिकायतों के आधार पर शीघ्रता से ट्रेस करने पर पता चला कि यह गिरोह सैकड़ों युवाओं को पहले भी चपत लगा चुका है और अब तफ्तीश को और तेज किया जा रहा है।

पुलिस की कार्रवाई व आगे की जाँच

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, म्यूल खाते मुहैया कराने वाले कनेक्शनों तथा कॉल‑सेंटर के पीछे के नेटवर्क की तलाश कर रही है। एक शिकायत में अमन अग्रवाल का मोबाइल नंबर भी संदिग्ध के रूप में दर्ज है, जिस पर विशेष नजर रखी जा रही है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी नौकरी के ऑफर पर तुरंत पैसे न दें, ऑफिशियल वेबसाइट और कंपनी के वैरिफाइड कॉन्टैक्ट की जाँच करें और शक होने पर साइबर क्राइम थाने से संपर्क करें।

नागरिकों के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरी के लिए किसी भी तरह की अग्रिम फीस, बैंक‑डिटेल साझा करने या एटीएम कार्ड/बैंक खाते किराए पर देने की सदैव जांच करें। किसी भी संदेहास्पद ऑफर की सूचना तुरंत नजदीकी साइबर क्राइम थाने या राष्ट्रीय शिकायत पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए। पुलिस ने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में शीघ्र रिपोर्ट करने से मनी‑फ्लो ट्रेस करना और पीड़ितों की रकम वापस दिलवाना आसान हो सकता है।

पुलिस ने कहा कि जाँच जारी है और मौके पर मिली डिजिटल सामग्री, कॉल रिकॉर्डिंग व बैंक ट्रांजैक्शन का विस्तृत फॉरेंसिक विश्लेषण कराकर गिरोह के पूरे नेटवर्क को उजागर किया जाएगा।

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