दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें साइबर अपराधियों ने एक 84 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर और उनकी पत्नी को करीब 12 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 2.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी पीड़ित राम प्रकाश हुर्रिया सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मेरठ, कड़कड़डूमा और सहारनपुर शाखाओं में मैनेजर रह चुके हैं।
कैसे शुरू हुई ठगी
मामले की शुरुआत 22 मई 2026 को हुई, जब पीड़ित के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से वॉट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम विजय खन्ना बताते हुए स्वयं को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि साल 2023 में केनरा बैंक के एक खाते से जुड़े करीब 538 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में पीड़ित का नाम इस्तेमाल हुआ है, जिसका संबंध जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल से जुड़े मामले से बताया गया। ठग ने यह भी कहा कि इस गबन से जुड़े 6.80 करोड़ रुपये पीड़ित के नाम के खाते में ट्रांसफर हुए हैं और इसी आधार पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
फर्जी ईडी अफसर और बनावटी अदालत का जाल
अगले ही दिन, 23 मई को रोहित गुप्ता नाम के एक शख्स ने वीडियो कॉल करके खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताया। जांच में सहयोग करने पर घर बैठे जमानत मिलने का झूठा भरोसा दिलाया गया और फिर वीडियो कॉल पर ही एक युवक को जज के वेश में बैठाकर पीड़ित से “पेशी” कराई गई। कथित जज ने धमकी दी कि जांच पूरी होने तक उनके बैंक खाते, सोना, मकान, कार समेत सभी संपत्तियों की पड़ताल की जाएगी और तभी पैसा वापस होगा। ठगों ने पीड़ित से वॉट्सएप चैट और नोटिफिकेशन तक डिलीट करा दिए तथा उन्हें लगातार निगरानी में रखा।
12 दिन तक रोज 4 से 8 घंटे पूछताछ
पीड़ित के मुताबिक 22 मई से 4 जून तक, यानी करीब 12 दिनों तक, साइबर ठगों ने उन्हें और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा और रोजाना चार से आठ घंटे तक पूछताछ की। बुजुर्ग दंपति को बार-बार जेल भेजने की धमकी दी गई। मानसिक दबाव बढ़ाने के लिए ठगों ने यह भी कहा कि यदि मामला बाहर निकला तो परिवार की बदनामी होगी और इससे उनकी पौत्री की शादी पर भी असर पड़ेगा।
पांच अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हुए रुपये
डर और दबाव में आकर पीड़ित ने जांच एवं सत्यापन के नाम पर पांच अलग-अलग ट्रांजैक्शन में करीब 2.19 से 2.20 करोड़ रुपये साइबर ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। हर बार नया खाता नंबर देकर रकम मंगाई गई। अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी खत्म होने के बावजूद ठगों का दबाव कम नहीं हुआ, जिसके बाद पीड़ित ने अपने सोने के जेवर पर करीब 50 लाख रुपये का गोल्ड लोन लिया और परिचितों से भी करीब 70 लाख रुपये उधार लेकर ठगों के खातों में भेजे।
शक होने पर दर्ज कराई शिकायत
जब लंबे समय बाद भी न तो जांच पूरी हुई और न ही पैसा वापस आया, तो पीड़ित को ठगी का अंदाजा हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई थी, उनकी डिटेल निकालकर आरोपियों की तलाश की जा रही है।
गाजियाबाद में थम नहीं रहा डिजिटल अरेस्ट का सिलसिला
यह गाजियाबाद-एनसीआर क्षेत्र में रिटायर्ड कर्मचारियों को निशाना बनाकर हो रही डिजिटल अरेस्ट ठगी का अकेला मामला नहीं है। इससे पहले एक रिटायर्ड महिला कर्मचारी से 37 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1.58 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था, जिसमें ठग दिल्ली पुलिस अफसर बनकर पेश हुए थे। वहीं इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के वसुंधरा में रहने वाले एक रिटायर्ड FCI अधिकारी को भी छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 60 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया जा चुका है। पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार आगाह कर रहे हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए “गिरफ्तारी” या “अरेस्ट” नहीं करती, और इस तरह की धमकी भरी कॉल आने पर तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए।

