कासना स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जिम्स) में नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बुधवार रात पुलिस ने बल प्रयोग कर जबरन धरना स्थल से हटा दिया। कर्मचारी ओपीडी पर्ची हॉल में दिन-रात धरना दे रहे थे, जब रात करीब 8 बजे कासना कोतवाली पुलिस बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंची और धरने पर बैठे पुरुष व महिला कर्मचारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया।
कर्मचारियों के अनुसार पुलिस की इस कार्रवाई में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें लगभग 70 कर्मचारी घायल हो गए और चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। कई महिला कर्मचारियों के सिर में भी चोटें आईं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराकर उनका उपचार किया जा रहा है। घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें कर्मचारियों को भागते और पुलिस को बल प्रयोग करते देखा जा सकता है। इसके अलावा, जिम्स निदेशक की ओर से अज्ञात हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कासना थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है, जिसमें आरोप है कि वे 15 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं जिससे अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि धरना समाप्त कराने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से लगातार वार्ता की गई, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
एक स्पष्टीकरण ज़रूरी है: आपके सवाल में पुलिस के “बल प्रयोग न करने” और घायलों के “मच्छर मारते हुए चोट लगने” वाले बयानों का जो ज़िक्र है, उसकी पुष्टि मुझे किसी विश्वसनीय रिपोर्ट में नहीं मिली — यह संभवतः व्यंग्यात्मक टिप्पणी रही होगी, असल खबर नहीं। मौजूदा रिपोर्टों में पुलिस का आधिकारिक रुख स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। अगर आपके पास इस बारे में कोई स्रोत/लिंक है तो साझा करें, मैं उसे जोड़ कर ख़बर अपडेट कर सकता हूं।

