भारत सरकार चीनी स्टील आयात की स्थिति पर कम से कम दो महीने और निगरानी रखेगी, उसके बाद ही सस्ते आयात को और रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों पर विचार करेगी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अभी एंटी-डंपिंग ड्यूटी या अन्य किसी नई कार्रवाई का फैसला नहीं लिया है। रॉयटर्स की खबर के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत सरकार ने कुछ चुनिंदा स्टील उत्पादों पर तीन साल के लिए आयात शुल्क लगाया था, ताकि चीन से आने वाले सस्ते स्टील शिपमेंट्स पर अंकुश लगाया जा सके। इसके बावजूद मई 2026 में भारत दूसरा महीना लगातार नेट आयातक बना रहा। मई में फिनिश्ड स्टील के आयात 0.7 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गए, जो पिछले छह महीनों के औसत से ज्यादा है, जबकि निर्यात सिर्फ 0.5 मिलियन मीट्रिक टन रहा, जो औसत से कम है। अप्रैल 2026 में चीन से भारत को फिनिश्ड स्टील का निर्यात दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, जो दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया। इससे भारतीय स्टील उद्योग में चिंता बढ़ गई है कि टैरिफ के बावजूद सस्ती चीनी प्रतिस्पर्धा घरेलू कंपनियों को नुकसान पहुंचा रही है। हॉट-रोल्ड कॉइल्स पर टैरिफ है, लेकिन स्टेनलेस स्टील उत्पाद इससे मुक्त हैं, और कुछ आयात वियतनाम जैसे देशों के रास्ते भी हो रहे हैं।
उद्योग की चिंताएं और सरकारी कदम
भारतीय स्टील निर्माता सस्ते चीनी आयात से जूझ रहे हैं। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड स्टील उत्पादक होने के बावजूद भारत पर आयात का दबाव बढ़ा है। स्टील मंत्रालय ने मेटलर्जिकल कोक (स्टील बनाने का कच्चा माल) पर लगाए गए प्रोविजनल एंटी-डंपिंग ड्यूटी को हटाने की सिफारिश की है, क्योंकि घरेलू आपूर्ति अपर्याप्त है और कीमतें ज्यादा हैं। वित्त मंत्रालय इस पर अंतिम फैसला लेना बाकी है। सरकार पहले ही स्टील इंपोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम (SIMS 2.0) को मजबूत कर चुकी है। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सरकार अनुचित आयात से बचाव के लिए और ट्रेड रेमेडीज लगाने पर विचार कर रही है। BIS प्रमाणीकरण में दी गई छूट और क्वालिटी कंट्रोल नियमों के जरिए भी आयात पर नियंत्रण रखने की कोशिशें जारी हैं।
वैश्विक संदर्भ
चीन दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है और अपनी अतिरिक्त क्षमता को अन्य बाजारों में भेज रहा है। भारत, अमेरिका और जापान जैसे देश चीनी स्टील के बढ़ते निर्यात से निपटने के लिए टैरिफ और अन्य उपाय अपना रहे हैं। भारत के लिए स्टील उद्योग जीडीपी में 2% का योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार देता है, इसलिए घरेलू उद्योग की सुरक्षा प्राथमिकता है। सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगले दो महीनों के आंकड़ों पर नजर रखने के बाद ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। स्टील मंत्रालय ने रॉयटर्स के सवालों पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह स्थिति भारतीय स्टील उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सस्ते आयात से कीमतों पर दबाव पड़ रहा है और घरेलू उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सरकार संतुलित रुख अपनाते हुए घरेलू उद्योग की रक्षा और कच्चे माल की उपलब्धता दोनों को ध्यान में रख रही है। आगे के महीनों के आयात आंकड़े इस मुद्दे पर अंतिम फैसले को तय करेंगे।

