विपक्ष में मची बड़ी भगदड़: TMC और शिवसेना (UBT) में बगावत के बाद अब UP में खलबली; क्या अखिलेश यादव के सांसदों पर है भाजपा की नजर?

लखनऊ/नई दिल्ली। देश की राजनीति में इस समय विपक्षी खेमे के भीतर एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है। पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक क्षेत्रीय क्षत्रपों के किलों में लगी सेंध ने अब उत्तर प्रदेश की सियासत में भी भारी खलबली मचा दी है। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद वहां पार्टी के सांसदों में बड़ी टूट और अलग गुट बनने की खबरें गर्म हैं, जिससे ममता बनर्जी का सियासी साम्राज्य संकट में नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत एक और बड़े विभाजन का सामना करना पड़ रहा है, जहां पार्टी के कई सांसदों और विधायकों के पाला बदलने की चर्चा तेज है।

इस दोहरे झटके ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव की रातों की नींद उड़ा दी है। यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी दलों में मची इस भगदड़ से सपा खेमे के भीतर भी डर और असुरक्षा का माहौल साफ देखा जा रहा है।

ममता और उद्धव के बाद अब अखिलेश के ‘गढ़’ पर संकट?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव या आंतरिक असंतोष के चलते टीएमसी और शिवसेना (UBT) के सांसद बगावती रुख अख्तियार कर रहे हैं, उसी फॉर्मूले से उत्तर प्रदेश में भी खेल हो सकता है। सपा सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव को यह अंदेशा सताने लगा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनके सांसदों और मजबूत विधायकों को तोड़कर समाजवादी पार्टी को एक बड़ा और आत्मघाती झटका दे सकती है।

अखिलेश यादव का बड़ा आरोप— ‘साजिश रच रही है भाजपा’

इस पूरे घटनाक्रम पर खुद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भाजपा की रणनीति पर तीखा हमला बोलते हुए माना है कि विपक्षी दलों के नेताओं और सांसदों को तोड़ने की एक सोची-समझी बड़ी साजिश चल रही है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि:

“भारतीय जनता पार्टी जिसे भी तोड़ना चाहती है, उसे सरकारी संस्थाओं के माध्यम से झूठे मुकदमों में फंसाकर और डरा-धमका कर अपने पाले में लाने का काम करती है। लेकिन देश और उत्तर प्रदेश की जनता इस तरह की राजनीति को देख रही है और आने वाले समय में करारा जवाब देगी।”

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के लिए कितना बड़ा खतरा?

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी इस समय पूरी तरह से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के साथ जमीन मजबूत करने में जुटी हुई है। ऐसे समय में यदि पार्टी का कोई भी सांसद या बड़ा चेहरा टूटकर भाजपा की तरफ जाता है, तो यह अखिलेश यादव के लिए न सिर्फ मनोवैज्ञानिक रूप से बल्कि सांगठनिक रूप से भी बहुत बड़ा झटका होगा।

विपक्षी एकजुटता के बिखरने और टीएमसी-शिवसेना (UBT) जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टियों के संकट में आने के बाद, अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी शह और मात का खेल बेहद आक्रामक हो गया है। देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव अपने कुनबे को इस संभावित राजनीतिक तूफान से बचाने के लिए क्या जवाबी रणनीति तैयार करते हैं।

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