उत्तर प्रदेश में लागू हुई ई-पंजीकरण व्यवस्था, विरोध प्रदर्शन जारी, बेरोज़गार हो जाएंगे हज़ारों एडवोकेट

उत्तर प्रदेश सरकार ई पंजीकरण व्यवस्था को नए तरीक़े से लागू कर रही है जिसके विरोध में आज UP के क़रीब 35 ज़िलों में रजिस्ट्रार दफ़्तर का काम कराने वाले एडवोकेट हड़ताल पर रहे हैं नोएडा सेक्टर 33 स्थित निबंधन विभाग में भी वकीलों ने हड़ताल की सब रजिस्ट्रार एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि इस नई व्यवस्था से हज़ारों वक़ील बेरोज़गार हो जाएंगे सरकार लोगों को सुविधा देने की आड़ में ये घिनौना खेल खेल रही हैं जब तक नई प्रणाली को वापस नहीं लिया जाएगा तब तक वक़ील हड़ताल पर रहेंगे आज सब रजिस्ट्रार ऑफ़िस में कामकाज पूरी तरह ठप रहा।

दरअसल उत्तर प्रदेश शासन ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए राज्य में पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और जन-सुलभ बनाने के लिए ‘ई-पंजीकरण’ (E-Registration) व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया है। वर्तमान में यह पूरी कार्यवाही ‘उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024’ के तहत ‘प्रेरणा’ (PRERNA) सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित की जा रही है।

सरकार ये बता रही फ़ायदे

अधिकृत संस्थाओं को मिलेगा पृथक लॉगिन, कार्यालय में उपस्थिति होगी अनिवार्य

ई-रजिस्ट्रीकरण व्यवस्था के अंतर्गत सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट और अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से दस्तावेजों के पंजीकरण की सुविधा मिलेगी।

प्राधिकृत अधिकारी: प्रत्येक अधिकृत संस्था द्वारा इस कार्य के लिए एक नोडल या प्राधिकृत अधिकारी नामित किया जाएगा।

पृथक लॉगिन आईडी: इन संस्थाओं को विभागीय पोर्टल पर कार्य संपादन के लिए एक अलग और सुरक्षित लॉगिन आईडी उपलब्ध कराई जाएगी।

कार्यालय में उपस्थिति: इस प्रक्रिया के दौरान संबंधित पक्षकारों (दस्तावेज निष्पादित करने वाले लोगों) का उस अधिकृत संस्था के कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य होगा।

अनुमोदित योजनाओं और स्वीकृत दस्तावेजों का ही होगा ई-रजिस्ट्रीकरण

शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ई-रजिस्ट्रीकरण की यह सुविधा केवल सरकार द्वारा अनुमोदित योजनाओं और स्वीकृत दस्तावेजों के लिए ही मान्य होगी। इन दस्तावेजों के प्रारूप (Format) का ऑनलाइन अनुमोदन संबंधित सहायक महानिरीक्षक निबन्धन (AIGR) द्वारा किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए बायोमेट्रिक उपकरणों, डिजिटल पहचान और डिजिटल हस्ताक्षरों (Digital Signatures) का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल सत्यापन (e-KYC) की व्यवस्था

मैनुअल भागदौड़ और धोखाधड़ी को रोकने के लिए इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है:

शुल्क का भुगतान: स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) और रजिस्ट्रीकरण शुल्क का भुगतान पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।

पहचान का सत्यापन: पक्षकारों का सत्यापन डिजिटल पहचान पत्र आधारित e-KYC अथवा अन्य वैध पहचान पत्रों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।

सम्पर्क विवरण: इसके साथ ही पक्षकारों को अपनी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराना होगा।

बायोमेट्रिक अनिवार्य: फोटो, डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से संपन्न किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

उप निबन्धक (Sub-Registrar) करेंगे ऑनलाइन जांच, डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा रिकॉर्ड

संस्था के स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संबंधित उप निबन्धक (Sub-Registrar) को भेज दिए जाएंगे।

  1. ऑनलाइन परीक्षण: उप निबन्धक द्वारा इन दस्तावेजों का ऑनलाइन परीक्षण और बारीकी से सत्यापन किया जाएगा।
  2. डिजिटल एंडोर्समेंट: इसके बाद रजिस्ट्रीकरण और पृष्ठांकन (Endorsement) की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से संपन्न की जाएगी।
  3. कानूनी मान्यता: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रस्तुत और पंजीकृत ये दस्तावेज पूर्णतः विधिमान्य (Legally Valid) होंगे। प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष पक्षकारों की उपस्थिति को कानूनी रूप से उप निबन्धक के समक्ष उपस्थिति के बराबर ही माना जाएगा।
  4. सुरक्षित डेटा: पंजीकृत होने के बाद ये सभी दस्तावेज विभागीय पोर्टल पर पूरी तरह से सुरक्षित और संरक्षित रहेंगे।

व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश

शासन का मानना है कि इस तकनीकी नवाचार से नागरिकों को त्वरित और पारदर्शी सेवा मिलेगी और निबन्धन कार्यालयों में भीड़भाड़ कम होगी। व्यवस्था को पूरी तरह सफल बनाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि ई-पंजीकरण से जुड़ी समस्त कार्यवाही महानिरीक्षक निबन्धन द्वारा प्राधिकृत संस्थाओं के स्तर से ही तय नियमों के अनुसार संपादित की जाए।

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