“फ्लोरिश स्टे” अग्निकांड: 21 मौतें, 12 विदेशी अभी भी अस्पताल में, मेडिकल टूरिज्म के नाम पर चल रहा था ‘मौत का होटल’

लाइसेंस 6 कमरों का, बना दिए 28 — मालिक गिरफ्तार, रसोइया भी हिरासत में; मजिस्ट्रेटी जांच शुरू

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज़ रानी इलाके में 3 जून को हुआ भीषण होटल अग्निकांड अब तक की सबसे दर्दनाक आग त्रासदियों में से एक बन चुका है। ‘फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट’ नामक इस छह मंजिला इमारत में लगी आग को बुझाने के लिए आठ दमकल गाड़ियाँ लगानी पड़ीं और 40 से अधिक लोगों को बचाया गया। इस हादसे में 21 लोगों की जान गई और 26 घायल हुए, जिन्हें एम्स, मैक्स हॉस्पिटल और दिल्ली के अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

आग कैसे लगी और कहाँ से फैली?

जाँच में सामने आया है कि आग सबसे पहले इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने ‘बी-एन-बी रेस्टोरेंट’ में लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी छह मंजिला इमारत, कमरों और बेसमेंट को अपनी चपेट में ले लिया। टेलीविज़न फुटेज में दो लोग ऊपरी मंजिल से कूदते दिखे और कई लोग धुएँ और लपटों के बीच इमारत में फँसे नज़र आए। राहत एवं बचाव कार्य के दौरान दमकल और स्थानीय नागरिकों की मदद से कुल 37 लोगों को सुरक्षित अथवा अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। स्थानीय लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछाकर उनकी मदद की और कुछ लोगों को तो स्थानीय नागरिकों ने अंदर जाकर बचाया।

मृतकों में 11 से अधिक विदेशी नागरिक

यह अग्निकांड इसलिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया क्योंकि इस दर्दनाक हादसे में जान गँवाने वालों में नेपाल, बांग्लादेश, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कांगो, नाइजीरिया, लाइबेरिया और मोज़ांबिक के नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 21 अन्य विदेशी नागरिक विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। घायलों में केन्या और कैमरून के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

13 मरीज़ अभी भी अस्पताल में, एक वेंटिलेटर पर

मैक्स हॉस्पिटल साकेत में 13 मरीज़ अभी भी उपचाराधीन हैं, जिनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं। एक मरीज़ वेंटिलेटर पर है लेकिन उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है, जबकि आईसीयू और वार्ड में भर्ती सभी अन्य मरीज़ चिकित्सकीय रूप से स्थिर हैं।

नियमों की धज्जियाँ: 6 कमरों की अनुमति, बना दिए 28

इस अग्निकांड ने प्रशासनिक लापरवाही की भी पोल खोल दी। एफआईआर के अनुसार यह गेस्टहाउस केवल 6 कमरों की अनुमति होने के बावजूद 28 कमरे संचालित कर रहा था। जाँचकर्ताओं ने अग्नि सुरक्षा ढाँचे और वेंटिलेशन सिस्टम में गंभीर खामियाँ भी पाई हैं। एफआईआर में यह भी दर्ज है कि बचाव दल के पहुँचने पर बेसमेंट का प्रवेश द्वार बंद मिला, जिसे दमकलकर्मियों को तोड़कर खोलना पड़ा। जाँच में यह भी पता चला कि होटल के पास मैक्स हॉस्पिटल है, जहाँ इलाज कराने के लिए आने वाले लोग इसी होटल में ठहरते थे। यही कारण था कि यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी मेडिकल पर्यटक रहते थे।

मालिक, रसोइया — गिरफ्तारियों का सिलसिला

होटल फ्लोरिश स्टे के सह-मालिक लवकेश बाजाज को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन पर लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। शनिवार को पुलिस ने होटल के रसोइये को भी गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया कि आग लगने में उसकी लापरवाही का हाथ हो सकता है। आरोपी की पहचान केशव नेगी (65 वर्ष), निवासी दिलशाद गार्डन, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस होटल से जुड़े एक करीबी सहयोगी और अकाउंटेंट जय मिश्रा की भी तलाश कर रही है, जो घटना के बाद से फरार है।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान, मजिस्ट्रेटी जाँच और शहरव्यापी कार्रवाई

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेटी जाँच के आदेश दिए और कहा कि जो भी इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार होगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि पूरे शहर में अवैध संपत्तियों, अनाधिकृत गेस्टहाउसों और अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

पृष्ठभूमि: दिल्ली में होटल अग्निकांडों की लंबी फेहरिस्त

यह कोई पहली बार नहीं है जब दिल्ली के किसी होटल में ऐसी भीषण आग लगी हो। इससे पहले 2019 में करोल बाग के होटल अर्पित पैलेस में आग में 17 लोगों की मौत हुई थी। बावजूद इसके अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक होटलों की नियमित जाँच और कड़ी जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।

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