अमेरिका के एक संघीय जज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (लगभग 85 लाख रुपये) की भारी फीस को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। जज ने इसे कांग्रेस की मंजूरी के बिना लगाया गया अनधिकृत ‘टैक्स’ बताया, जो राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा से बाहर है। यूएस डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन ने सोमवार को बोस्टन में दिए अपने फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा सितंबर 2025 में लागू की गई यह फीस वास्तव में एक टैक्स है, जिसे लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। जज सोरोकिन, जिनकी नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने की थी, ने 42 पृष्ठों के फैसले में लिखा, “इस फीस की प्रकृति और इसके लागू होने का तरीका स्पष्ट रूप से बताता है कि यह एक टैक्स है, चाहे इसे कुछ भी नाम दिया जाए।”
विवाद की पृष्ठभूमि
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन जारी कर H-1B वीजा पर यह नई फीस लगाई थी। H-1B वीजा उच्च कुशल विदेशी कर्मचारियों, खासकर टेक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र में काम करने वालों के लिए दिया जाता है। सालाना कुल 85,000 वीजा (65,000 सामान्य + 20,000 उन्नत डिग्री वाले) उपलब्ध होते हैं। पहले फीस कुछ हजार डॉलर ही थी, लेकिन नई फीस ने इसे 20-50 गुना बढ़ा दिया। ट्रंप ने दावा किया था कि H-1B प्रोग्राम का दुरुपयोग हो रहा है, जिसमें अमेरिकी कामगारों की जगह सस्ते विदेशी श्रमिकों को रखा जा रहा है। हालांकि, आलोचकों और टेक कंपनियों ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया, क्योंकि सिलिकॉन वैली समेत कई क्षेत्र विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर हैं। कैलिफोर्निया सहित 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इस फीस के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह फीस उनकी राज्यों की यूनिवर्सिटी, स्कूलों, अस्पतालों और कंपनियों की क्षमता को प्रभावित कर रही है। जज सोरोकिन ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए फीस को पूरी तरह रद्द कर दिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास विदेशी नागरिकों के प्रवेश को सीमित करने का पूर्ण अधिकार है, अगर वे अमेरिका के हितों के खिलाफ हों। प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहा है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह अवैध और महंगी टैक्स उच्च कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता पर हमला था। यह फैसला हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला है।”
व्यापक प्रभाव
यह फैसला टेक उद्योग के लिए बड़ी राहत है। H-1B वीजा पर निर्भर कंपनियां पहले ही इस फीस से परेशान थीं। फरवरी 2026 तक केवल 85 आवेदनों पर ही यह फीस जमा हुई थी, जो दर्शाता है कि इसका असर सीमित रहा। यह मुकदमा अन्य चुनौतियों के बीच आया है। पहले एक अन्य जज ने फीस को बरकरार रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले ने इस मामले में नई दिशा दी, जिसमें ट्रंप की व्यापक शक्तियों पर रोक लगाई गई थी। H-1B प्रोग्राम लंबे समय से विवादास्पद रहा है। समर्थक इसे अमेरिकी नवाचार और आर्थिक विकास का इंजन मानते हैं, जबकि आलोचक इसे अमेरिकी नौकरियों के लिए खतरा बताते हैं। ट्रंप प्रशासन ने फीस के अलावा H-1B आवेदकों की जांच सख्त करने और उच्च कुशल-उच्च वेतन वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने के प्रस्ताव भी दिए थे।
आगे क्या?
अपील प्रक्रिया शुरू होने के साथ यह मामला ऊपरी अदालतों तक जा सकता है। फिलहाल, नई फीस लागू नहीं रहेगी, जिससे H-1B प्रक्रिया पुरानी फीस पर वापस आ सकती है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की प्रवासन नीतियों पर एक और कानूनी झटका है, जो पहले भी कई अदालतों में चुनौती का सामना कर चुकी हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता पर इसका दूरगामी असर पड़ सकता है।

