अटारी (पंजाब) — सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों और आम नागरिकों की उपस्थिति में प्रसिद्ध संगीतकार ए.आर. रहमान ने शनिवार को अटारी बॉर्डर पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में देशभक्ति के सुर बिखेरे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहमान द्वारा लोकप्रिय गीत “माँ तुझे सलाम” (वंदे मातरम) का जज़्बाती प्रदर्शन रहा, जिसने उपस्थित दर्शकों और वहां तैनात सुरक्षा बलों में गहरा उल्लास पैदा कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर मौजूद कलाकारों और गायकों के साथ ‘वंदे मातरम’ की मधुर धुन के साथ हुई। पृष्ठभूमि में बजती सुरताल के साथ रहमान ने एक-एक शब्द में देशभक्ति की गूँज फैला दी। मंच के सामने से मार्च करते हुए BSF के जवानों ने कार्यक्रम की गरिमा और उत्सव में चार चाँद लगाए। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और सीमा पर तैनात अधिकारियों ने कार्यक्रम का शिष्टाचारपूर्वक निरीक्षण किया।
मुकाबले का मुख्य क्षण तब आया जब रहमान ने गीत की मुख पंक्तियाँ गाईं — “यहाँ-वहाँ सारा जहाँ देख लिया, कहीं भी तेरे जैसा कोई नहीं है…” — और फिर पूरे जोश के साथ “माँ तुझे सलाम… माँ तुझे सलाम…” का उद्घोष किया। इस दौरान उन्होंने हाथ उठाकर जवानों और दर्शकों को अभिवादन किया। कुछ क्षणों के लिए वह मंच से आगे बढ़कर अटारी बॉर्डर के मुख्य गेट की ओर भी गए, जहाँ सामने बैठे सुरक्षा बलों और अधिकारियों ने मंचीय प्रस्तुति का आनंद लिया। दर्शक दीर्घा में बैठे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, महिला अधिकारी तथा अन्य आम नागरिक तालियों और उत्साह से कलाकारों का समर्थन करते रहे। कलाकारों और वाद्ययंत्रों के संयुक्त प्रदर्शन ने कार्यक्रम को भावपूर्ण और संगीतमय बना दिया। अंतिम क्षणों में रहमान ने पूरी ऊर्जा के साथ ‘वन्दे मातरम’ की अंतिम धुन गाकर कार्यक्रम का समापन किया, और मंच पर मौजूद सभी ने तथा दर्शक दीर्घा ने मिलकर लंबे समय तक तालियाँ बजाईं।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम सीमावर्ती सुरक्षा बलों के मनोबल बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे और सीमापार की किसी प्रकार की घुसपैठ या अनियोजित गतिविधि का कोई संकेत नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद कई जवानों ने बताया कि उन्हें यह कार्यक्रम भावविभोर कर देने वाला लगा और उन्होंने रहमान व अन्य कलाकारों का आभार व्यक्त किया। ए.आर. रहमान ने अपने प्रदर्शन के बाद मीडिया से संक्षेप में कहा कि संगीत सीमाओं को पार कर देता है और ऐसे आयोजनों का उद्देश्य सैनिकों के समर्पण को सलाम करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देशभक्ति के इस स्वर से देशवासियों में एक नया उत्साह जागेगा।

