मेंटेनेंस शुल्क में 40% बढ़ोतरी के विरोध में उठी आवाज़, सुपरटेक इकोविलेज-1 के निवासियों ने मांगा ऑडिट, पारदर्शिता और सहमति

बिना पूर्व सूचना और परामर्श के लागू की गई CAM शुल्क वृद्धि से भड़के हज़ारों परिवार, प्राधिकरण से हस्तक्षेप की मांग; नोएडा-ग्रेटर नोएडा की कई हाउसिंग सोसायटियों में फैल रही है यह बेचैनी

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की आवासीय सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क को लेकर बढ़ता असंतोष अब सुपरटेक इकोविलेज-1 तक जा पहुँचा है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित इस विशाल आवासीय परिसर के निवासियों ने कॉमन एरिया मेंटेनेंस (CAM) शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि पर कड़ा एतराज़ जताया है। निवासियों का कहना है कि मेंटेनेंस एजेंसी ने बिना किसी पूर्व चर्चा के एकतरफा ढंग से शुल्क में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी, जो किसी भी दृष्टि से अस्वीकार्य है।

पूरे नोएडा-NCR में फैल रही है यह आग

यह विवाद तब और गहरा हो गया जब सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क के निवासियों ने भी मेंटेनेंस शुल्क में करीब 48 प्रतिशत की वृद्धि का विरोध किया।  यह मामला केवल एक सोसायटी तक सीमित नहीं है जयपी विश्टाउन, सिविटेक स्टेडिया, गुलशन बोटेनिया, गोल्फ सिटी और गौर ग्रैंडियर जैसी सोसायटियों में भी 20 से 50 प्रतिशत तक की मेंटेनेंस शुल्क वृद्धि या तो लागू की जा चुकी है या प्रस्तावित है। अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मज़दूरी में 20-21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद सुपरटेक और जयपी जैसी सोसायटियों में काम करने वाले प्राइवेट सुरक्षाकर्मी और मेंटेनेंस स्टाफ ने भी बेहतर वेतन के लिए धरना दिया। इस मज़दूरी वृद्धि का बोझ अब सोसायटी प्रबंधन ने सीधे निवासियों पर डाल दिया है और यही इस आंदोलन की मूल जड़ बन गई है।

नुकसान का दावा, पर जवाब नहीं

मेंटेनेंस एजेंसी ने शुल्क वृद्धि को उचित ठहराने के लिए वित्तीय घाटे का हवाला दिया है, लेकिन निवासियों ने इस तर्क को सिरे से नकार दिया है। निवासी रंजना सूरी भारद्वाज ने सवाल उठाया, “यदि मेंटेनेंस एजेंसी वर्षों से घाटे में चल रही है, तो इससे उसके परिचालन की स्थिरता और सोसायटी की वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।” निवासियों ने यह भी कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सबसे बड़ी आवासीय सोसायटियों में से एक होने के नाते इकोविलेज-1 के पास मेंटेनेंस शुल्क के अलावा भी आय के कई स्रोत हैं, और इन सभी के बारे में पारदर्शिता ज़रूरी है।

सेवाएं सुधरें, तब होगी बात

निवासियों की एक साझा भावना यह है कि शुल्क वृद्धि से पहले सेवाओं में सुधार आना चाहिए। रंजना सूरी भारद्वाज ने कहा, “यदि हाउसकीपिंग, सुरक्षा, बागवानी और सुविधा रखरखाव के मानकों में आने वाले महीनों में उल्लेखनीय सुधार होता है, तो हम शुल्क संशोधन पर विचार कर सकते हैं। लेकिन लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान किए बिना बढ़ोतरी थोपना किसी भी तरह उचित नहीं है।”

दस बड़ी शिकायतें, जो वर्षों से अनसुनी

निवासियों ने कई समस्याओं की एक विस्तृत सूची प्रस्तुत की है जो नियमित मेंटेनेंस भुगतान के बावजूद अनसुलझी बनी हुई हैं। इनमें प्रमुख हैं — अपर्याप्त सुरक्षाकर्मी और बार-बार बदलाव, टावरों व साझा क्षेत्रों में खराब सफाई, बेसमेंट में कूड़े का अंबार, बागवानी की उपेक्षा, एंट्री और बेसमेंट गेट पर खराब एक्सेस कंट्रोल, अंधेरे बेसमेंट, बार-बार लिफ्ट खराब होना, पार्किंग प्रबंधन की अव्यवस्था, साझा बुनियादी ढाँचे की खस्ता हालत और अग्निशमन प्रणाली की अनदेखी।

वित्तीय ऑडिट की माँग, “हमें हिसाब चाहिए”

निवासी समीर भारद्वाज ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम मेंटेनेंस वसूली, परिचालन खर्च, लंबित उपयोगिता भुगतान और सोसायटी के भीतर राजस्व के अन्य स्रोतों की पूरी जानकारी चाहते हैं। निवासियों पर कोई भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने से पहले समुदाय के सामने आय-व्यय का पारदर्शी हिसाब रखा जाए।” समीर भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठाया कि क्या इकोविलेज-1 में मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाने से पहले Apex Committee और Learned Amicus Curiae की अनुमति ली गई थी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सुपरटेक के अनेक प्रोजेक्ट उच्चतम न्यायालय की निगरानी में हैं।

निवासियों का आक्रोश, “यह एकतरफा फैसला नामंज़ूर”

निवासी राकेश तिवारी ने अपना आक्रोश खुलकर व्यक्त किया, “सुपरटेक इकोविलेज-1 के निवासियों के साथ बिना किसी पूर्व चर्चा के मेंटेनेंस शुल्क में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई, यह सभी निवासियों को अस्वीकार्य है। अधिकारियों को मेंटेनेंस एजेंसी के इस गैरकानूनी कदम में हस्तक्षेप करना चाहिए।”

निवासी बुरहान खान ने मध्यमवर्गीय परिवारों की पीड़ा का ज़िक्र करते हुए कहा

“आम आदमी को हर तरफ से निचोड़ा जा रहा है। आज के दौर में साधारण नागरिक का जीना बेहद मुश्किल हो गया है।” वहीं दिनकर पांडेय ने दो टूक शब्दों में कहा, “यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।”

पृष्ठभूमि: सुपरटेक और इकोविलेज-1

सुपरटेक का इकोविलेज-1 प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में करीब 7,500 आवासीय इकाइयों वाला एक विशाल आवासीय परिसर है। यह सोसायटी ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सबसे घनी आबादी वाली परियोजनाओं में से एक है, जहाँ हज़ारों मध्यमवर्गीय परिवार निवास करते हैं। निवासियों का बिजली कटौती, जनरेटर के लिए अत्यधिक शुल्क और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध का इतिहास रहा है।

विशेषज्ञों की राय — क्या कहता है कानून?

आवासीय विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट (प्रमोशन ऑफ कंस्ट्रक्शन, ओनरशिप एंड मेंटेनेंस) एक्ट के तहत मेंटेनेंस शुल्क में कोई भी बदलाव निवासी कल्याण संघ (RWA) या निवासियों के प्रतिनिधियों की सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। जहाँ बिल्डर या एजेंसी अभी भी प्रबंधन संभाल रही हो, वहाँ GNIDA और उच्चतम न्यायालय के Apex Committee जैसे निकायों की भूमिका और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

व्यापक तस्वीर — और कब तक?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई सोसायटियों में मेंटेनेंस एजेंसियाँ बढ़ती श्रम लागत, वैधानिक खर्च और महंगाई को शुल्क वृद्धि का कारण बता रही हैं, जबकि निवासी जवाबदेही, पारदर्शिता और सेवाओं में सुधार की माँग कर रहे हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अमरापाली गोल्फ होम्स और किंग्सवुड जैसी सोसायटियों में भी निवासियों ने मेंटेनेंस फंड में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन किए, और पारदर्शी ऑडिट तथा जवाबदेह प्रशासन की माँग की। ला रेसिडेंशिया सोसायटी, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भी निवासियों ने अनियमित जलापूर्ति, बार-बार बिजली कटौती और खराब लिफ्ट जैसी समस्याओं के लिए बिल्डर की जवाबदेही की माँग करते हुए 10 दिन का धरना देने की घोषणा की है।

निवासियों की तीन मुख्य माँगें

वित्तीय ऑडिट, सोसायटी की आय, व्यय और सभी राजस्व स्रोतों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। पारदर्शिता, सभी वित्तीय विवरण निवासियों के सामने सार्वजनिक किए जाएं। परामर्श, किसी भी शुल्क वृद्धि से पहले निवासियों से व्यापक विचार-विमर्श अनिवार्य हो। जैसे-जैसे नोएडा और ग्रेटर नोएडा की आवासीय सोसायटियों में विरोध बढ़ रहा है, मेंटेनेंस शुल्क तेज़ी से हाई-राइज़ निवासियों के लिए सबसे विवादास्पद मुद्दा बनता जा रहा है। GNIDA, ज़िला प्रशासन और Apex Committee से माँग की जा रही है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और यह सुनिश्चित करें कि हज़ारों मध्यमवर्गीय परिवारों की मेहनत की कमाई किसी एकतरफा निर्णय की बलि न चढ़े।

यह भी पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में दोपहर को छाया अंधेरा, तूफान-बारिश ने मचाई तबाही, पर किसी के फोन पर नहीं आया इमरजेंसी अलर्ट

यहां से शेयर करें