सुरक्षा उपकरण नहीं, परिवार को सूचना तक नहीं; मज़दूर संघों का फूटा गुस्सा
पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में एक बार फिर मज़दूरों की जान सस्ती साबित हुई। इंडस्ट्रियल एरिया-ए स्थित आरके रोड पर डीप टूल्स प्राइवेट लिमिटेड नामक हैंड टूल्स और मशीनरी निर्माण इकाई में सोमवार तड़के करीब ढाई बजे एक दर्दनाक हादसे में तीन मज़दूरों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। मृतकों में 46 वर्षीय मन सिंह (जिन्हें मन्ना भी कहा जाता था) और उनके 26 वर्षीय बेटे अमित के साथ-साथ एक तीसरे मज़दूर श्री राम का नाम शामिल है। ये सभी फैक्ट्री की सीवर लाइन को साफ करने के दौरान ज़हरीली गैस की चपेट में आ गए।
कैसे हुआ हादसा
रविवार और सोमवार की दरमियानी रात फैक्ट्री प्रबंधन ने मन सिंह और उनके बेटे अमित को उस सीवर सिस्टम की सफाई का काम सौंपा था, जहाँ औद्योगिक अपशिष्ट और गंदगी जमा होती है। तीन अन्य मज़दूर इस काम में सहयोग के लिए तैनात किए गए थे। जैसे ही सीवर लाइन खोली गई और मज़दूर उसमें उतरे, भारी मात्रा में जमा ज़हरीली गैस अचानक बाहर निकल आई। पाँचों मज़दूर बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान तीनों की मौत हो गई। जाँच में सामने आया कि मज़दूर बिना किसी अनिवार्य सुरक्षा किट या सुरक्षात्मक उपकरण के सीवर लाइन में उतरे थे।
“बाप मना कर रहे थे, फिर भी जाने पर मजबूर किया”
मन सिंह की बेटी रेनू ने मीडिया को बताया कि उनके पिता उस रात काम पर जाने में हिचक रहे थे, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें जबरदस्ती ड्यूटी पर आने का दबाव बनाया। हादसे के बाद भी परिवार को कोई सूचना नहीं दी गई। जब सुबह तक घर वाले वापस नहीं आए तो परिजन खुद फैक्ट्री पहुँचे और वहाँ से अस्पताल का पता चला। वहाँ जाकर उन्हें मालूम हुआ कि पिता-पुत्र दोनों की मृत्यु हो चुकी है। यानी जो बाप-बेटा एक साथ रोज़ी-रोटी कमाने निकले थे, वो एक साथ ही इस दुनिया से चले गए, और घर वालों को खबर भी नहीं हुई।
FIR दर्ज, प्रशासन सक्रिय
लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने पुष्टि की कि मोती नगर थाने में फैक्ट्री मालिक और प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। एसडीएम जसलीन भुल्लर और डीसीपी जसकिरनजीत सिंह तेजा ने मौके का दौरा किया। जिला प्रशासन ने एक बहु-विभागीय फोरेंसिक जाँच भी शुरू की है, जिसमें दो मुख्य पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है पहला, किन औद्योगिक रसायनों के मिश्रण से यह जानलेवा गैस बनी; और दूसरा, क्या फैक्ट्री ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के सुरक्षा मानकों का पालन किया था।
मज़दूर संघों का विरोध
इस हादसे से स्थानीय मज़दूर यूनियनों और श्रमिक संगठनों में भारी रोष है। यूनियन नेताओं ने साफ कहा कि बिना सुरक्षा उपकरणों के मैनुअल सफाई कराना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि हत्या के समान है। उन्होंने नियोक्ता के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की माँग की। यह पहली बार नहीं गौरतलब है कि लुधियाना में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले गियासपुरा इलाके में सीवर में ज़हरीला रसायन बहाने से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके, औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही जारी है।
विशेषज्ञों की राय
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसी घातक गैसें जमा हो जाती हैं। इनसे बचाव के लिए श्रमिकों को ऑक्सीजन मास्क, सेफ्टी हार्नेस और गैस डिटेक्टर अनिवार्य रूप से देना होता है जो इस फैक्ट्री में नहीं दिया गया। बाप और बेटा एक ही काम, एक ही जगह, एक ही मौत। यह खबर महज़ एक हादसे की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जहाँ गरीब मज़दूर के जीवन की कीमत उत्पादन की लागत से कम आँकी जाती है।

