आरडब्ल्यूए ने प्राधिकरण को सौंपा 18 सूत्री ज्ञापन, 15 मई को निरीक्षण का आश्वासन; लेकिन जमीन हालात जस के तस
नोएडा सेक्टर 51 की बदहाली: नोएडा के उन सेक्टरों में जिनकी गिनती शहर के सबसे पॉश और विकसित इलाकों में होती है सेक्टर 51 उनमें प्रमख है। कागजों पर यह सेक्टर एक आदर्श आवासीय कत्र की तस्वीर पेश करता है, लेकिन धरतल पर यहाँ के हालात किसी उपेक्षित बस्ती से कम नहीं। पर्कों में नशेड़ियों का डेरा, सड़कों पर अवैध अतिक्रमण, पुलिस गश्त का नाम मत्र, और टूटी सड़कें यह है सेक्टर 51 की असली तस्वीर, जिसे यहाँ के निवासी और आरडब्ल्यूए पदधिकारी बार-बार उठाते आए हैं। हाल ही में सेक्टर के निवासियों ने अपनी पीड़ा बयान की, तो एक-एक बत सुनकर रोंगट खड़े हो गए। निवासी ओजस्वी सिंह ने बताया कि पार्कों में दिनभर नशेड़ी जमे रहते हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों का वहाँ जाना लगभग असंभव हो गया है। सौरभ शाह ने कहा कि बच्चों के खेलने के मैदान के ठीक पास नशे का कारोबार खुलेआम चलता है। लव दुबे ने तो यहाँ तक कहा कि गट नंबर 12 के आसपास चलने वाले नशे के धंधे ने परे सेक्टर को अपराधियों का अड्डा बना दिया है और यहाँ कई ऐसे लोग रह रहे हैं जिनका पुलिस वेरफिकेशन तक नहीं हुआ है।
जिम बना जंग, पार्क बना अखाड़ा
आरडब्ल्यूए उपध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर में ओपन जिम की सुविधा तो बनाई, लेकिन दो साल से वह खराब हालत में पड़ी है। नशेड़ी वहाँ से उपकरण तक उठा ले जाते हैं और प्राधिकरण की तरफ से कोई मरम्मत नहीं होती। डॉ. सुनीता जेटली ने कहा कि पार्कों में टहलना मुश्किल हो गया है विरोध करने पर लोग अभद्रता पर उतर आते हैं और पुलिस इन्हें पकड़कर फिर छोड़ देती है।
सड़कें बनीं पार्किंग स्थल, ट्रैफिक पुलिस गायब
महासचिव संजीव कुमार के मुताबिक मुख्य सड़क पर अवैध ऑटो और ई-रिक्शा का जमावड़ा लगा रहता है। 18 मीटर चौड़ी सड़क पर डेयरी, ई-रिक्शा और ठेले खड़े रहते हैं। बीडीएस मार्ट और क्लाउड-9 असताल के सामने होने वाले अतिक्रमण को तत्काल हटाने की मांग आरडब्ल्यूए की ओर से बार-बार उठाई जाती रही है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदग बस कागजों में है व्यवहार में ड्यूटी स्थल से गयब रहती है।
मेट्रो स्टशन के पास पैदल चलना भी दूभर
सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन के आसपास हालत और भी बदतर है। मेट्रो ट्रैक के नीचे चलने वाले भारी ट्रैफिक से ध्वनि प्रदूषण की गंभीर समस्या बनी हुई है सुबह से देर रात तक मेट्रो, ट्रकों और भारी वाहनों के शोर से निवासियों की दिनचर्या और सस्थ्य प्रभावित हो रहा है। फुटपथों पर अवैध रेहड़ी पटरियों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल है।
पुलिस गश्त सिर्फ रजिस्टर में
निवासियों का सबसे बड़ा आरोप है कि पुलिस गश्त महज औपचारिकता बन चुकी है। पुलिसकर्मी आते हैं, रजिस्टर में दस्तखत करते हैं और चले जाते हैं सेक्टर के भीतर वास्तविक गश्त शायद ही कभी होती है। इसी वजह से नशेड़ी निडर होकर पार्कों में बैठते हैं और चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
आरडब्ल्यूए का ज्ञापन और प्राधिकरण का आश्वासन
इस माह सेक्टर-51 की आरडब्ल्यूए का एक प्रतनिधिमंडल नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी श्री कांति शखर और वर्क सरल-3 के सीनियर मैनजर श्री प्रवीण सालोनया से मिला और ट्रैफिक, सीवर ओवरफ्लो, नइस पॉल्यूशन, टूटी सड़कों, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और ग्रीन बेल्ट संरक्षण सहित 18 पमुख मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ओएसडी ने सभी बिंदुओं पर गभीरता से चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, और सीनियर मैनेजर ने आश्वासन दिया कि 15 मई 2026 को सेक्टर-51 का निरीक्षण किया जाएगा, लेकिन दिन निकल गए तारीख भी बदल गई अब कुछ समय पश्चात महीना भी बदल जाएगा लेकिन प्राधिकरण का निरीक्षण धरा का धरा रह गया। लेकिन निवासियों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी मल चुके हैं और हर बार जमीनी हलात नहीं बदले।
प्राधिकरण का अभियान, लेकिन सेक्टर 51 उपेक्षित
नोएडा प्राधिकरण ने फरवरी 2026 में एक साथ दस स्थानों पर अतिक्रमण उन्मूलन अभियान चलाया था, और 11 फरवरी को भी सेक्टर 51 (एनआरआई रोड) सहित 20 से अधिक सेक्टर में बुलडोजर अभियान चला। लकिन निवासियों का कहना है कि ये अभियान चंद घंटों के लिए आते हैं और जाने के बाद सब कुछ फिर वैसा ही हो जाता है।
निवासियों की मागें
सेक्टर के निवासियों ने स्पष्ट माग रखी है: पार्कों और गलियों में नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित की जाए, मेट्रो स्टेशन के आसपास और मुख्य सड़क से अवैध अतिक्रमण पूरी तरह हटाया जाए, ओपन जिम और पार्कों की मरम्मत की जाए, बिना वेरिफिकेशन रह रहे लोगों की जाँच हो और नशे का कारोबार चला रहे गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई हो। आरडब्ल्यूए महासचिव संजीव कुमार ने कहा — “सेक्टर-51 और आसपास के क्षेत्रों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो निवासियों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।” सवाल यह है कि नोएडा का यह ‘पॉश’ सेक्टर कब तक कागजों में पॉश और जमीन पर बदहाल बना रहेगा? जवाब देना होगा प्राधिकरण को भी, पुलिस को भी।

