नोएडा श्रमिक हिंसा: विपुल मोटर्स में दर्जनों वाहन जलाने वाला नरेश कुमार गिरफ्तार, मानेसर आंदोलन से भी जुड़े तार

मोबाइल सिम पोर्ट कर पुलिस को चकमा देने की कोशिश नाकाम, वैज्ञानिक साक्ष्यों से हुई पहचान

नोएडा श्रमिक हिंसा: गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-63 में 13 अप्रैल को भड़की श्रमिक हिंसा के मामले में एक और बड़ी गिरफ्तारी हुई है। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने वांछित अभियुक्त नरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जिस पर विपुल मोटर्स के समीप खड़े दर्जनों चार पहिया और दो पहिया वाहनों में आग लगाने का आरोप है। अभियुक्त महाविरा कम्पनी, सेक्टर-63 में टेलर के पद पर कार्यरत था।

क्या था 13 अप्रैल का मामला?

नोएडा में 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर धरने पर बैठे कर्मचारियों का प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर गाड़ियों में तोड़फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। सेक्टर-63 स्थित विपुल मोटर्स में भी भीषण आगजनी हुई, वहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की एक गाड़ी भी पलट दी और पत्थरबाजी की। इस हिंसा में 300 से अधिक कंपनियों में तोड़फोड़ की गई।पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, घटना के दिन नरेश कुमार पहले महाविरा कम्पनी परिसर में घुसा और वहाँ कर्मचारियों को हड़ताल के लिए उकसाया। इसके बाद उनके साथ नारेबाजी करते हुए बाहर निकला और विपुल मोटर्स के सामने पहुँचा, जहाँ पहले से भीड़ जमा थी। वहाँ उसने अपने साथियों के साथ सुनियोजित तरीके से दर्जनों वाहनों में आग लगाई और लोहे के पाइप से तोड़फोड़ कर अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया।

वैज्ञानिक तरीके से हुई पहचान

पुलिस टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अभियुक्त की पहचान की। एकत्रित साक्ष्य में नरेश कुमार स्पष्ट रूप से आगजनी की घटना कारित करता हुआ दिख रहा है। घटना के बाद आरोपी ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए अपना मोबाइल सिम दूसरी सर्विस प्रदाता कंपनी में पोर्ट करा लिया था, लेकिन पुलिस ने इस चाल को नाकाम करते हुए उसका मोबाइल बरामद कर लिया।

मानेसर आंदोलन से भी जुड़े तार

इस गिरफ्तारी में एक अहम खुलासा यह भी हुआ कि नरेश कुमार का संबंध हरियाणा के मानेसर में हुए पूर्ववर्ती श्रमिक आंदोलन से भी रहा है। उसके मोबाइल से श्रमिक यूनियन से संबंधित दस्तावेज और अभिलेख भी बरामद हुए हैं, जो उसके संगठित श्रमिक आंदोलन नेटवर्क से जुड़े होने की ओर इशारा करते हैं।

पाकिस्तान कनेक्शन तक पहुँची जाँच

इस पूरे प्रकरण की जाँच अब और गहरी हो गई है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने खुलासा किया है कि श्रमिक आंदोलन को हाईजैक करने के लिए दो सोशल मीडिया अकाउंट पाकिस्तान से सक्रिय थे, जिनकी इंटरनेट कनेक्टिविटी और आईपी एड्रेस पाकिस्तान के हैं। प्रारंभिक जाँच में संदिग्ध विदेशी कनेक्शन, विशेषकर पाकिस्तानी लिंक सामने आने के बाद एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) भी इस मामले की जाँच में जुट गई है। पुलिस ने मजदूर बिगुल दस्ता संगठन के प्रमुख रुपेश राय समेत 18 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया है। जाँच में सामने आया है कि यही संगठन इस पूरे उपद्रव के पीछे मुख्य भूमिका में था।

अब तक की कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हिंसा के साजिशकर्ताओं और आगजनी करने वालों के खिलाफ 13 मुकदमे लिखे गए हैं, जबकि अब तक 62 से अधिक लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है। पुलिस कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन श्रमिकों की जायज मांगों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन हिंसा और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हिंसा में शामिल आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

हालात अब सामान्य

तीन दिनों तक जारी हिंसक प्रदर्शन के बाद नोएडा में स्थिति सामान्य हो गई है। सेक्टर-63 और सेक्टर-57 समेत कई औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियाँ फिर से खुल गई हैं और श्रमिक काम पर लौट आए हैं। हालाँकि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल अभी भी तैनात है।  अभियुक्त नरेश कुमार, पुत्र छोटेलाल, मूल निवासी ग्राम जैतीखेड़ा, थाना कल्याणपुर, जिला फतेहपुर, वर्तमान में चोटपुर, थाना सेक्टर-63 में रह रहा था। उम्र लगभग 45 वर्ष। उसे थाना सेक्टर-63 में पंजीकृत मुकदमे में गिरफ्तार किया गया है।

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