कांगो और युगांडा से आने वाले यात्रियों पर विशेष नज़र, दिल्ली एयरपोर्ट ने जारी की एडवाइज़री
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद भारत सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए देशभर के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों और प्रमुख बंदरगाहों पर कड़ी स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है।
पृष्ठभूमि: कहाँ से शुरू हुआ यह प्रकोप?
15 मई 2026 को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के पूर्वोत्तर प्रांत इतुरी में इबोला के प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि की। अब तक 500 से अधिक संदिग्ध मामले और 130 संदिग्ध मौतें दर्ज हो चुकी हैं, हालांकि केवल 30 मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हो पाई है। इस बार इबोला का जो दुर्लभ प्रकार फैला है, उसे “बंदीबुग्यो वायरस” कहते हैं, जो कई हफ्तों तक बिना पहचाने फैलता रहा क्योंकि अधिकारी सामान्य और अधिक प्रचलित इबोला प्रकार की जांच कर रहे थे, जिसके नतीजे नकारात्मक आ रहे थे। WHO ने चेतावनी दी है कि प्रकोप का वास्तविक दायरा अब तक की रिपोर्ट से कहीं बड़ा हो सकता है। इसके अलावा, युगांडा की राजधानी कम्पाला में भी एक के बाद एक दो प्रयोगशाला-पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें से एक की मृत्यु हो गई।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया: हाई अलर्ट पर स्वास्थ्य तंत्र
WHO द्वारा इबोला को अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद भारत सरकार ने देशभर में निगरानी और तैयारी के उपाय तत्काल प्रभाव से कड़े कर दिए। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों को हर स्तर पर तत्परता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यात्रियों के आगमन-पूर्व और आगमन-पश्चात स्क्रीनिंग, क्वारंटीन प्रोटोकॉल, केस प्रबंधन, रेफरल प्रणाली और प्रयोगशाला जांच पर विस्तृत SOP सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा कर दी है। समन्वित निगरानी, समय पर रिपोर्टिंग और नामित स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारी पर विशेष जोर दिया गया है।
दिल्ली एयरपोर्ट की एडवाइज़री: किन देशों से आने वालों पर नज़र?
दिल्ली एयरपोर्ट ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों के लिए विशेष एडवाइज़री जारी की है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षणों पर तुरंत हवाई अड्डे के स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित करें और स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए चिकित्सा कर्मचारियों के साथ सहयोग करें।
इबोला क्या है और यह कैसे फैलता है?
इबोला वायरस अत्यंत संक्रामक है और उल्टी, रक्त या वीर्य जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टी, दस्त, मांसपेशियों में दर्द और कभी-कभी आंतरिक एवं बाह्य रक्तस्राव शामिल हैं। बंदीबुग्यो वायरस के लिए अभी कोई टीका उपलब्ध नहीं है और WHO के अनुसार इसे विकसित करने में कम से कम छह से नौ महीने लग सकते हैं।
भारत में अभी तक कोई मामला नहीं
भारत में इबोला का अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में इबोला संक्रमण की कोई सूचना नहीं है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता से घबराने की बजाय सरकारी स्रोतों से सटीक जानकारी लेने की अपील की है।
WHO और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति
WHO ने स्पष्ट किया है कि यह प्रकोप “महामारी आपातकाल” की श्रेणी में नहीं आता जैसा COVID-19 था, और संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं बंद करने के खिलाफ सलाह दी है। WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम ग्रेब्रेयसस ने प्रकोप की “व्यापकता और गति” को लेकर चिंता जताई है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की प्रतिक्रिया सही दिशा में है। सरकार ने संदिग्ध मामलों के तत्काल प्रबंधन हेतु विशेष अलगाव और क्वारंटीन सुविधाएं भी चिह्नित कर ली हैं, ताकि सामुदायिक प्रसार को रोका जा सके। भारत में इबोला का कोई मामला नहीं है, फिर भी सरकार की सतर्कता यह दर्शाती है कि वैश्विक महामारियों से सुरक्षा के लिए समय रहते कदम उठाना कितना ज़रूरी है।

