नोएडा बना खड्डा: 265 टेंडर, करोड़ों का बजट, फिर भी शहर भर में सड़कें गड्ढों में तब्दील; अधिकारियों की चेतावनी के बाद भी काम ठप

नोएडा बना खड्डा: फरवरी से अब तक 265 टेंडर आवंटित होने और करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद नोएडा के कई सेक्टरों की सड़कों की हालत बदत्तर होती जा रही है। सीईओ के सात मई के अल्टीमेटम और विभागीय कार्रवाई तथा ब्लैकलिस्टिंग की चेतावनी के बावजूद सेक्टर-11, 12, 22, 27, 34, 73, 99 और 105 सहित कई इलाकों में सड़कें खुले गड्ढों, उखड़ी हुई डामर और टूटे किनारों के कारण रहने-यात्रा के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं।

टेंडर के बावजूद काम रुका

प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी से मई तक कुल 265 टेंडर आवंटित किए गए हैं और सड़कों की मरम्मत व निर्माण के लिए करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है। बावजूद इसके स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जमीन पर काम दिखाई नहीं देता। सेक्टरवासियों ने बार-बार शिकायतें कीं लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। कई स्थानों पर मरम्मत कार्य अधर में लटका बताया जा रहा है।

बिटुमिन की कीमत व आपूर्ति पर विवाद

नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एस.पी. सिंह ने स्थिति की व्याख्या करते हुए कहा, “बिटुमिन की कमी के कारण सड़कों का निर्माण कार्य रुका हुआ है। निर्माण के संबंध में ठेकेदारों को चेतावनी दे दी गई है, लेकिन ठेकेदारों का कहना है कि सरकार के आदेश का इंतज़ार है।” विभाग का कहना है कि बिटुमिन की वैश्विक व घरेलू कीमतों में उछाल और आपूर्ति में व्यवधान ने काम धीमा कर दिया है। वहीं स्थानीय निवासी और आरडब्ल्यूए इसका ठोस और स्वीकार्य जवाब नहीं मान रहे।

नागरिकों की नाराजगी और सुरक्षा चिंताएँ

सेक्टर-12 और 22 की आंतरिक सड़कों पर रोजाना दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं, जबकि सेक्टर-73 में जलभराव ने स्थिति और जटिल कर दी है। सेक्टर-99 के ए ब्लॉक की सड़कें खासकर खतरनाक मानी जा रही हैं और स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार हो रहा है। सेक्टर-105 में भी कई सड़कें गहरे गड्ढों में बदल चुकी हैं। स्थानीय निवासी मंजू (सेक्टर-11) कहती हैं, “सड़कें टूट चुकी हैं। हर दिन हादसे का डर बना रहता है, लेकिन विभाग को फर्क नहीं पड़ता।” वहीं यू. शर्मा (सेक्टर-22) ने कहा कि “265 टेंडर के बाद भी काम शुरू नहीं होना साफ दिखाता है कि विभाग ठेकेदारों पर नियंत्रण खो चुका है।”

आरडब्ल्यूए और सामुदायिक मांगें

सेक्टर-27 आरडब्ल्यूए ने प्राधिकरण से मांग की है कि नई सड़क बिछाने से पहले पुरानी सड़क को पूरी तरह उखाड़कर सही स्तर पर निर्माण कराया जाए, ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी हल निकले। कई आरडब्ल्यूए ने यह भी कहा कि सालाना करोड़ों रुपये खर्च दिखाने के बावजूद वास्तविक मरम्मत होती नहीं दिखती, और पारदर्शिता व काम की नियमित निगरानी की जरूरत है।

प्राधिकरण की आगामी कार्रवाई पर निगाह

प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार सीईओ द्वारा दिया गया अल्टीमेटम लागू कर दिया गया है और डिपार्टमेंट ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहा है, जिसमें ब्लैकलिस्टिंग और देरी के लिए दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं। हालांकि स्थानीय निवासी पूछ रहे हैं कि चेतावनियों के बावजूद धरातल पर कब बदलाव दिखाई देंगे।

राहगीरों को निर्देश और सावधानियाँ

लोकल ट्रैफिक पुलिस और आरडब्ल्यूए ने निवासियों से अनुरोध किया है कि वे खराब सड़कों पर सावधानी बरतें, रात में धीमी गति से चलें और जहां संभव हो वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें। साथ ही लोगों से दुर्घटनाओं की तस्दीक के लिए फोटो-वीडियो और शिकायतें प्राधिकरण की हेल्पलाइन पर भेजने का आह्वान किया गया है।

तत्काल आवश्यकताएँ

आपूर्ति और कीमतों पर केंद्रीय अथवा राज्यस्तरीय समन्वय की मांग। ट्रांज़िशनल मरम्मत के लिए तात्कालिक फंड और पैचवर्क का निर्देश। कार्यों की पारदर्शी मॉनिटरिंग: समयबद्ध प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आदेश।देरी पर ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर नए टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा।

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