50 साल का नोएडा: अब भी बस के इंतज़ार में, तीन बार बनी योजनाएं हुईं धूल-धूसरित, अब चौथी कोशिश पर टिकी लाखों की उम्मीद

50 साल का नोएडा: देश के सबसे आधुनिक और हाईटेक शहरों में शुमार नोएडा अपनी स्थापना के 50 साल पूरे कर चुका है, गगनचुंबी इमारतें हैं, चमचमाती सड़कें हैं, आईटी हब है, लेकिन जो नहीं है वो है, एक साधारण सिटी बस। यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि जब प्रधानमंत्री ईंधन बचत के लिए कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील करते हैं, तो नोएडा के आम नागरिक के पास उस अपील को अमल में लाने का कोई साधन ही नहीं होता। आज भी नोएडा के लाखों निवासी या तो दिल्ली की डीटीसी बसों और मेट्रो के भरोसे हैं, या फिर ऑटो और ई-रिक्शा में धक्के खाने को विवश हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गाजियाबाद और दादरी जाने वाले यात्रियों के लिए तो सरकारी परिवहन का कोई विकल्प ही नहीं है।

घाटे में डूबा 2016 का प्रयोग, 2024 में भी नहीं चली बात

यह पहली बार नहीं है जब नोएडा में सिटी बस सेवा की बात हुई हो। 2016 में नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) ने 11 रूटों पर फीडर बस सेवा शुरू की थी, लेकिन कम यात्री संख्या और भारी घाटे के चलते नवंबर 2020 में यह सेवा बंद कर दी गई। 2024 में एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण और UPSRTC के बीच 27 रूटों पर 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनी, लेकिन वह भी फाइलों की भूलभुलैया में कहीं खो गई।

अब 2026 में चौथी कोशिश — 50 ई-बसें, 4 अहम रूट

इस बार नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के नेतृत्व में UPSRTC के साथ मिलकर 50 नई इलेक्ट्रिक सिटी बसों के संचालन का फैसला लिया गया है। इन बसों को शहर के चार अहम रूटों पर चलाया जाएगा, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

प्रस्तावित रूट इस प्रकार हैं:

सेक्टर-90 स्थित बस डिपो और बॉटेनिकल गार्डन को प्रमुख प्रारंभिक केंद्र बनाया गया है, जहां से बसें ग्रेटर नोएडा वेस्ट (गौड़ चौक), जेवर एयरपोर्ट, सेक्टर-62 और फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र होते हुए सूरजपुर कलेक्ट्रेट तक जाएंगी। 50 बसों में से 45 का सक्रिय संचालन होगा और 5 बसें स्टैंडबाय पर रखी जाएंगी। यात्रियों को हर 15 मिनट के अंतराल पर बस मिलने की सुविधा होगी।

किराया सस्ता, घाटा भरेगा प्राधिकरण

बसों का संचालन UPSRTC द्वारा निर्धारित किराए पर किया जाएगा, जबकि संचालन में होने वाले घाटे यानी Viability Gap Funding (VGF) का खर्च नोएडा प्राधिकरण वहन करेगा। इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों की जेब पर अनावश्यक बोझ न पड़े और सेवा की व्यावसायिक स्थिरता भी बनी रहे।

हाईटेक चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार

सेक्टर-90 में अत्याधुनिक बस डिपो विकसित किया जा रहा है, जिसमें 20 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे जो एक साथ 50 बसों को चार्ज कर सकेंगे। इसके अलावा बॉटेनिकल गार्डन बस स्टैंड पर 4 ऑपर्च्युनिटी चार्जिंग स्टेशन भी लगाए जाएंगे, जहां 8 बसों को एक साथ चार्ज किया जा सकेगा। मोरना बस डिपो में इलेक्ट्रिक चार्जिंग की सुविधाएं पहले ही तैयार कर ली गई हैं।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने भी उठाया कदम

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में भी चार प्रमुख रूटों पर 15 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की मंजूरी दी गई है। शुरुआती चरण में यह सेवा छह महीने के लिए प्रायोगिक तौर पर शुरू होगी और इस दौरान लगभग 1.80 करोड़ रुपये का संचालन खर्च ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण खुद वहन करेगा।

इस बार क्यों है उम्मीद?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आगामी संचालन और क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक निवेश को देखते हुए प्राधिकरण को उम्मीद है कि इस बार बसों को पर्याप्त यात्री मिलेंगे। अधिकारियों के अनुसार ये बसें अगले 3 से 4 महीने में सड़कों पर दौड़नी शुरू हो सकती हैं।

जमीनी हकीकत — अभी भी ऑटो-रिक्शा का राज

फिलहाल नोएडा के सेक्टर 37, बॉटनिकल गार्डन, सेक्टर 62, मॉडल टाउन, सेक्टर 71 अंडरपास और सेक्टर 49 जैसे इलाकों में ऑटो और ई-रिक्शा का ही बोलबाला है। नोएडा में इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण लोग ई-रिक्शा, ऑटो और टैक्सी पर निर्भर रहते हैं।  ये साधन न तो सुरक्षित हैं, न किफायती और न ही नियमित।

अधिकारी बोले — इस बार पक्का

नोएडा अथॉरिटी के ओएसडी जनस्वास्थ्य एसके सिंह का कहना है कि अगले महीने से UPSRTC के साथ मिलकर सिटी बस सेवा शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है और 100 इलेक्ट्रिक बसों से शुरुआत होगी जो नोएडा एयरपोर्ट तक जाएगी। नोएडा डिपो के एआरएम लोकेश कुमार बताते हैं कि अभी नोएडा डिपो में 138 बसें संचालित हो रही हैं और इंटरसिटी बस सेवा के लिए प्रक्रिया जारी है।

सवाल वही पुराना — क्या इस बार बात बनेगी?

नोएडा की जनता को उम्मीद तो है, लेकिन भरोसा करना मुश्किल है। 2016, 2024 के वादे याद हैं। अब देखना यह है कि इस बार की ‘अलग स्थिति’ जेवर एयरपोर्ट, बढ़ता औद्योगिक निवेश और बेहतर वित्तीय मॉडल क्या सचमुच इस योजना को अमलीजामा पहना पाएगी?  अगर ऐसा हुआ तो 50 साल बाद नोएडा को पहली बार अपनी असली ‘लाइफलाइन’ मिलेगी।

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