पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी जहाँगीर खान ने अपना नाम वापस ले लिया है। यह घटना राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रही है। एक तरफ जहाँ TMC पहले से ही पश्चिम बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद कमज़ोर स्थिति में है, वहीं इस फ़ैसले ने फाल्टा की सियासी तस्वीर को और पेचीदा बना दिया है।
पृष्ठभूमि: क्यों हो रहा है फाल्टा में पुनर्मतदान?
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में मूल मतदान 29 अप्रैल 2026 को हुआ था। हालाँकि, कई मतदान केन्द्रों पर बड़े पैमाने पर धाँधली की शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग ने 2 मई को फाल्टा चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया और 21 मई को पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया। निर्वाचन आयोग ने फाल्टा में कम से कम 60 मतदान केन्द्रों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और “गंभीर निर्वाचन अपराधों” का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया।
जहाँगीर खान: ‘पुष्पा’ से ‘आरोपी’ तक का सफ़र
चुनाव प्रचार के दौरान जहाँगीर खान ने खुद को बॉलीवुड फ़िल्म के किरदार ‘पुष्पा’ की तरह प्रस्तुत किया था, जब IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को ‘सिंघम’ से उपमा दी जा रही थी। एक वायरल वीडियो में वह अधिकारी खान के परिवार को मतदाताओं को न डराने की चेतावनी देते दिखे। खान, अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं अभिषेक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और TMC के शीर्ष नेता हैं।
एक के बाद एक मुकदमे — कोर्ट की शरण
नाम वापसी से पहले जहाँगीर खान पर मुकदमों की बाढ़ आ गई थी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नोट किया कि 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से जहाँगीर खान के खिलाफ लगातार पाँच आपराधिक मामले दर्ज किए गए। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि यह “चौंकाने वाला” है कि 4 मई को परिणाम घोषित होने के बाद 5 मई से एक के बाद एक आपराधिक मामले दर्ज होने शुरू हुए — जो “राजनीतिक परिदृश्य बदलने” के कारण प्रतीत होते हैं।
खान के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को व्यवस्थित तरीके से आपराधिक मामलों की झड़ी लगाकर निशाना बनाया जा रहा था, ताकि वे प्रभावी प्रचार न कर सकें। इस पर 18 मई को कोर्ट ने आदेश दिया कि 26 मई तक खान के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, साथ ही उन्हें ECI दिशानिर्देशों का पालन करते हुए प्रचार जारी रखने की अनुमति दी।
TMC की बेबसी — न नेता, न कार्यकर्ता मैदान में
खबरें आ रही थीं कि TMC फाल्टा में प्रचार से गायब है। यहाँ तक कि BJP प्रत्याशी देबांग्शु पांडा भी यह देखकर हैरान थे कि TMC उनके खिलाफ प्रचार ही नहीं कर रही। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक TMC के कई स्थानीय नेता चुनाव-बाद के तनाव के कारण ‘छिपे’ हुए हैं। वाम मोर्चे के उम्मीदवार शम्भू कुर्मी ने कहा कि TMC सरकार जाने के बाद ही वे क्षेत्र में खुलकर प्रचार कर सके। उनके अनुसार, जहाँगीर ने पहले कभी विपक्षी दलों को इस क्षेत्र में प्रचार नहीं करने दिया था।
BJP का आक्रामक रुख़
BJP राज्य अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने रविवार को व्यंग्यात्मक लहजे में TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी को फाल्टा में प्रचार के लिए आमंत्रित किया, यह कहते हुए कि वे “वीर” को याद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी ने फाल्टा रैली में BJP प्रत्याशी को एक लाख से अधिक मतों से जिताने का आह्वान किया और दावा किया कि फाल्टा-डायमंड हार्बर के लोग एक दशक तक खुलकर वोट नहीं डाल सके। उन्होंने क्षेत्र के लिए विशेष विकास पैकेज की भी घोषणा की।
फाल्टा का चुनावी परिदृश्य
फाल्टा में कुल 2,36,444 मतदाता हैं, जिनमें लगभग 1,21,300 पुरुष और 1,15,135 महिला मतदाता शामिल हैं। 285 मतदान केन्द्रों पर 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा और मतगणना 24 मई को होगी। TMC 2011 से यह सीट जीतती आ रही है। 2021 में TMC ने यहाँ BJP को 40,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था। अब जहाँगीर खान के नाम वापस लेने के बाद यह सीट BJP के लिए और आसान हो सकती है।
विश्लेषण: दबाव में आत्मसमर्पण या रणनीतिक पीछे हट?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जहाँगीर खान का नाम वापस लेना कई संकेत देता है। एक तरफ सत्ता परिवर्तन के बाद दर्ज किए गए आपराधिक मामलों का दबाव था, दूसरी तरफ TMC का पूरे राज्य में कमज़ोर होता संगठनात्मक ढाँचा। इस फ़ैसले से TMC की स्थिति और नाज़ुक हो गई है। फाल्टा की यह लड़ाई अब सिर्फ एक विधानसभा सीट की नहीं, बल्कि डायमंड हार्बर मॉडल और अभिषेक बनर्जी की साख की परीक्षा बन गई है और TMC इस परीक्षा में बिना अपने प्रत्याशी के उतर रही है।

