नोएडा, सेक्टर-78 स्थित वेदवन पार्क के बाहर वर्षों से अनियंत्रित रहने वाले स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी) और पार्किंग/प्रवेश मार्गों पर संचालित अवैध व्यापार ने पार्क के मुख्य द्वार व आसपास के इलाकों में तंग स्थिति पैदा कर दी है। कई ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के निवासी रविवार को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश को लिखित शिकायत भेजकर समस्या के शीघ्र और प्रभावी समाधान की मांग कर चुके हैं। निवासियों का आरोप है कि पूर्व सीईओ के कार्यकाल में यह क्षेत्र ‘नो वेंडिंग/नो पार्किंग’ जोन घोषित किया गया था, लेकिन अब वह घोषणा केवल कागजों में ही सिमटकर रह गई है।
निवासियों ने पत्र में बताया कि पार्क के मुख्य द्वार और उसके आसपास चाट, गोलगप्पा, जूस, खिलौने व अन्य दुकानें सुबह से रात तक जमकर लगा रखी हैं, जिससे पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार बाधित हो चुका है और आगंतुकों के सुरक्षित व सुगम प्रवेश में अवरोध उत्पन्न हो रहा है। विशेषकर शाम के समय पार्क के पास आवाजाही पूरी तरह जाम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पार्क व आसपास का क्षेत्र गंदगी, कचरा संचय और शोर प्रदूषण से प्रभावित हो रहा है, जिससे निवासियों की जीवन गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। निवासियों ने लिखा है कि दोनों गेटों पर निजी सुरक्षा कर्मी तैनात होने के बावजूद उन्हें सक्रियता नहीं दिख रही, और पार्क के संचालक द्वारा वसूला जाने वाला 20 रुपये का प्रवेश शुल्क जमीनी स्तर पर उचित प्रबंधन और व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। दिन में वर्क सर्किल-6 के फील्ड अधिकारी पार्क की बाउंड्री के पास मौजूद रहते हैं, पर सालों से अतिक्रमण का स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को बिना समुचित निवारण के बंद कर दिया जाता है और निरीक्षण से पूर्व अतिक्रमणकारियों को सूचित कर दिया जाता है, जिससे प्रदत्त अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
प्राधिकरण ने लिया संज्ञान, संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा
प्राधिकरण के एक अधिकारी ओएसडी इंदु प्रकाश सिंह ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया गया है। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, परन्तु निवासियों का कहना है कि अब तक होने वाली कार्रवाइयाँ सतही और अस्थायी रहीं हैं, जिनसे समस्या दूर नहीं हुई।
निवासियों की मांगें
नो वेंडिंग जोन के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध त्वरित और निरंतर कार्रवाई हो। संबंधित अधिकारियों और तैनात सुरक्षा कर्मियों की जवाबदेही तय की जाए। प्रवेश शुल्क के अनुरूप पार्क का प्रबंधन और साफ-सफाई सुनिश्चित हो।आईजीआरएस शिकायतों का पारदर्शी और प्रभावी निवारण किया जाए। पार्क के बाहर लगे रेहड़ियों और फैली गंदगी की तस्वीरें भी स्थानीय निवासियों ने साझा की हैं, जिनमें सडक़ किनारे जमा कूड़ा और चहलकदमी दिखती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समस्या का ठोस निराकरण नहीं हुआ तो वे संगठित होकर और सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
क्या होगा आगे?
विदित हो कि नोएडा किसी योजनाबद्ध शहर के रूप में जाना जाता है और इस तरह के लंबे समय तक चलने वाले अतिक्रमण शहर की सार्वजनिक इमेज पर भी असर डालते हैं। अब सवाल यह है कि प्राधिकरण की चेतावनी और संबंधित अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट के बाद वास्तविक धरातलीय कार्रवाई किस प्रकार और किस समय में की जाएगी। प्रशासन यदि शीघ्र और प्रभावी कदम उठाता है तो पार्क और आसपास का वातावरण सुधर सकता है; वरना वर्षों से चली आ रही समस्याएँ और शिकायतों की नब्ज पर ही बनी रहेंगी।

