आरजी कर रेप-मर्डर मामले में तीन आईपीएस अधिकारि निलंबित

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को घोषणा की कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई जूनियर डॉक्टर की बलात्कार और हत्या के मामले में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी शामिल हैं।

नबन्ना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री अधिकारी ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने न केवल मामले को ठीक से हैंडल नहीं किया, बल्कि पीड़िता के परिवार को रिश्वत देने की कोशिश की और बिना लिखित आदेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। उन्होंने कहा कि इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू की जाएगी।  यह फैसला राज्य में सत्ता परिवर्तन के महज कुछ दिनों बाद आया है। भाजपा के नेतृत्व में सुवेंदु अधिकारी की सरकार 9 मई 2026 को शपथ ग्रहण के साथ सत्ता में आई थी, जिसने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की 15 साल पुरानी सरकार का अंत किया।

मामले की पृष्ठभूमि

9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में तृतीय वर्ष की पोस्ट ग्रेजुएट छात्रा डॉक्टर को सेमिनार हॉल में निर्वस्त्र अवस्था में मृत पाया गया। पुलिस ने 33 वर्षीय सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया और उसे मामले का मुख्य आरोपी बताया। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी और डॉक्टरों ने लंबे समय तक आंदोलन किया। पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर पानिहाटी सीट से जीत हासिल की थी।  मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच में सबूतों के साथ छेड़छाड़, अस्पताल प्रबंधन में अनियमितताएं और अन्य गंभीर पहलुओं के संकेत मिले थे। पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष समेत कई लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे।

निलंबन का महत्व

मुख्यमंत्री अधिकारी ने इस कार्रवाई को न्याय की दिशा में एक ठोस कदम बताया। उन्होंने संकेत दिया कि आरजी कर मामले सहित अन्य संवेदनशील घटनाओं (जैसे संदेशखाली) की जांच के लिए विशेष आयोग गठित करने पर विचार चल रहा है। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, जबकि पूर्ववर्ती सरकार पर लापरवाही और साक्ष्य छिपाने के आरोप लगते रहे हैं। आरजी कर कांड ने चिकित्सा व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। देशभर में डॉक्टरों के आंदोलन के बाद सुरक्षा मानकों में सुधार के वादे किए गए थे, लेकिन न्याय की पूरी प्रक्रिया अभी भी जारी है। यह घटनाक्रम बंगाल की नई सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है, जहां पुरानी घटनाओं में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। मामले की आगे की जांच और विभागीय कार्यवाही पर नजरें टिकी हुई हैं।

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