राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। 11 मई 2026 की देर रात उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रानी बाग नांगलोई इलाके में एक महिला को एक प्राइवेट स्लीपर बस में खींचकर ड्राइवर और कंडक्टर ने सामूहिक दुष्कर्म किया। यह घटना 2012 के निर्भया कांड की भयावह यादें ताजा कर रही है, और पूरे देश में आक्रोश की लहर है।
घटना का पूरा ब्यौरा
पीड़िता दो बच्चों की माँ है और दिल्ली के बाहरी इलाके में एक झुग्गी-बस्ती में रहती है। वह रात करीब 12:15 बजे अपने भाई से मिलकर घर लौट रही थी। वह माधुबा चौक जाना चाहती थी और सरस्वती विहार बस स्टैंड के पास पहुँची, जहाँ से उसने वह बस पकड़ी जिसमें पहले से तीन पुरुष सवार थे। पीड़िता मंगोलपुरी की एक फैक्ट्री में काम करती है। रात को काम के बाद घर लौटते समय बस चालक और परिचालक ने उसे जबरदस्ती बस में खींच लिया और यौन उत्पीड़न किया। तीन में से एक व्यक्ति के उतर जाने के बाद बाकी दोनों ने बस को पीड़िता के बोर्डिंग स्थल से 7 किलोमीटर दूर एक सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि बाद में उसे बस से धकेलकर फेंक दिया गया।
गिरफ्तारी और जाँच
दोनों आरोपी उमेश और रमेंद्र, जो मूल रूप से आगरा और हाथरस के रहने वाले हैं, दिल्ली में पिछले 5–6 साल से बस चला रहे थे। पुलिस CCTV फुटेज की जाँच कर रही है और बस के रूट व आरोपियों की पृष्ठभूमि की भी जाँच की जा रही है। बस को फॉरेंसिक जाँच के लिए जब्त कर लिया गया है। आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और अदालत में उनकी पेशी हुई जहाँ पीड़िता का बयान भी दर्ज किया गया। हालाँकि आरोपियों ने दावा किया कि यह घटना “पैसे के विवाद” का मामला है, लेकिन पुलिस इस दावे की जाँच कर रही है। पुलिस उस पूरे रास्ते का नक्शा तैयार कर रही है जिससे बस गुजरी, और यह भी जाँचा जा रहा है कि उस वक्त बस में कोई और था या नहीं।
NCW का सख्त रुख
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर से सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट माँगी। NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर मामले में तत्काल, कड़ी और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया। आयोग ने बस ऑपरेटर या मालिक की जाँच और वाहन के संचालन की जानकारी भी माँगी है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि रात के समय महिलाओं की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक व निजी परिवहन में क्या सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
देवोलीना का सरकार पर तीखा हमला ‘बेटी बचाओ सिर्फ दिखावा है’
टेलीविज़न अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी, जो महिला अधिकारों के मुद्दों पर हमेशा मुखर रहती हैं, ने इस घटना पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ महज एक नारा बनकर रह गया है, ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक देश की बेटियाँ यूँ असुरक्षित रहेंगी। इस घटना ने पूरे देश में महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। 2012 के निर्भया मामले से इसकी तुलना की जा रही है उस केस में एक 23 वर्षीय छात्रा के साथ चलती बस में छह लोगों ने बर्बरता की थी और उसकी मौत हो गई थी।
पीड़िता के परिवार की अपील
पीड़िता के पति ने कहा कि घटना के बाद ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत मदद की उनका बयान दर्ज किया, अस्पताल पहुँचाया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। पति ने अपील की कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
निर्भया के 14 साल बाद भी वही दर्द
2012 और 2026 दोनों मामलों में एक ही डरावना पैटर्न दिखता है, बस में अकेली महिला, रात का वक्त, और दरिंदे। यह दोनों घटनाएँ सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा की बदहाल स्थिति और सामाजिक बदलाव की धीमी रफ्तार को बेनकाब करती हैं। समाज और सरकार के सामने सवाल वही पुराना है क्या हम अपनी बेटियों को सुरक्षित रख पाने में सक्षम हैं? जवाब अभी भी नहीं मिला।

