पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को वकील की ब्लैक कोट और गाउन पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट में हाजिरी दी। वे खुद को एक वकील के रूप में पेश करते हुए 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई पोस्ट-पोल हिंसा के मामले में पैरवी करने पहुंचीं। इस मामले में बीजेपी समर्थकों और कार्यकर्ताओं पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं द्वारा हमले के आरोप लगे हैं, जो टीएमसी के 10 साल के शासनकाल के दौरान की घटनाओं से जुड़े हैं।
ममता बनर्जी ने अदालत में दलील दी कि हिंसा की घटनाएं राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि कुछ असामाजिक तत्वों का काम थीं। उन्होंने कहा, “यह मामला टीएमसी के खिलाफ राजनीतिक साजिश है। हम कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।” कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई के लिए टाल दी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब बंगाल में बीजेपी की सरकार सत्ता में है। विपक्षी दलों ने इसे ‘ड्रामा’ करार दिया, जबकि बीजेपी ने ममता पर ‘कानून से बचने’ का आरोप लगाया।
इसी बीच, पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनाव आयोग के नेतृत्व वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को नई दिशा मिली है। अब यह डेटा केवल चुनावी सूचियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक कल्याण योजनाओं में फर्जी, मृत और अयोग्य लाभार्थियों की पहचान के लिए इस्तेमाल होगा। दोनों राज्यों की बीजेपी सरकारें SIR डेटा का उपयोग कर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) में रिसाव रोकने की तैयारी में हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR अभियान के तहत लाखों नामों की जांच हुई, जिसमें डुप्लिकेट वोटर आईडी और मृत व्यक्तियों के नाम शामिल थे। बंगाल में करीब 12 लाख और बिहार में 8 लाख से अधिक नाम हटाए गए। अब इन डेटा का इस्तेमाल ‘लक्ष्मीर भांगा’, ‘दुर्गा माला’ जैसी योजनाओं में होगा, जहां करोड़ों रुपये का गबन रुकेगा। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “यह पारदर्शिता लाएगा और गरीबों तक लाभ पहुंचेगा।” बंगाल के मुख्यमंत्री ने भी इसे समर्थन दिया। यह कदम केंद्र सरकार की ‘जन धन-आधार-मोबाइल’ (JAM) ट्रिनिटी को मजबूत करेगा, जिससे वेलफेयर डिलीवरी में पारदर्शिता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सालाना अरबों रुपये की बचत होगी। हालांकि, विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक हथियार’ बताया, खासकर टीएमसी ने आरोप लगाया कि SIR का दुरुपयोग हो रहा है। इन घटनाक्रम से साफ है कि बंगाल की राजनीति में कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर नई जंग छिड़ गई है। ममता बनर्जी की अदालती उपस्थिति और SIR का विस्तार राज्य की सत्ता परिवर्तन के बाद की चुनौतियों को उजागर करता है।

