अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन चल रहा है। इस सम्मेलन की पृष्ठभूमि में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का साया छाया हुआ है, जिसमें अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन को सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ा लाभ मिल रहा है। वहीं, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजराइल के खिलाफ फाइबर-ऑप्टिक ‘अनजैमेबल’ ड्रोन तैनात कर दिए हैं, जो इजराइली रक्षा प्रणालियों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। ट्रंप-शी बैठक में ईरान संकट को सुलझाने के लिए चीन की भूमिका, व्यापार, ताइवान और आर्थिक संबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि चीन को ईरान पर दबाव बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, क्योंकि ईरानी तेल का बड़ा खरीदार होने के नाते बीजिंग के पास तेहरान पर प्रभाव है। ट्रंप ने कहा, “हम या तो डील करेंगे या वे तबाह हो जाएंगे।” सम्मेलन में टेस्ला, ऐपल और एनवीडिया जैसे दिग्गज सीईओ भी शामिल हैं, जो व्यापार समझौतों को बढ़ावा देने के लिए आए हैं।
चीन को ईरान युद्ध से फायदा
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय अमेरिकी खुफिया मूल्यांकन में पाया गया है कि ईरान युद्ध (फरवरी 2026 से) के दौरान चीन अमेरिका पर कई क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर रहा है। ईरानी तेल का सस्ता आयात कर चीन ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है, जबकि क्षेत्रीय देशों को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाकर अपना कूटनीतिक प्रभाव विस्तारित कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि चीन कंपनियों के जरिए ईरान को कुछ सैन्य सामग्री या प्रौद्योगिकी समर्थन दे सकता है। युद्ध ने अमेरिका के संसाधनों को खींचा है, जिसका फायदा चीन उठा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष बीजिंग को अमेरिकी सैन्य रणनीति, मिसाइल इंटरसेप्शन और एआई उपयोग का अध्ययन करने का मौका दे रहा है, जो ताइवान या अन्य संभावित संकटों में काम आ सकता है। ट्रंप प्रशासन इस बढ़ती Chinese leverage को कम करने के लिए शिखर सम्मेलन में कड़ी डिप्लोमेसी कर रहा है।
हिजबुल्लाह का नया ‘गेम चेंजर’ हथियार
ईरान युद्ध के बीच लेबनान में हिजबुल्लाह ने इजराइल के खिलाफ एक नई रणनीति अपनाई है फाइबर-ऑप्टिक केबल से जुड़े FPV (फर्स्ट पर्सन व्यू) विस्फोटक ड्रोन। ये ड्रोन सस्ते कमर्शियल पार्ट्स से बनाए जाते हैं और रेडियो सिग्नल की बजाय फाइबर-ऑप्टिक तार (दांतों की सफाई के फ्लॉस जितना पतला) से नियंत्रित होते हैं। इससे इजराइली जामिंग सिस्टम बेकार हो जाते हैं और ड्रोन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
इजराइली सेना के अनुसार, इन ड्रोन ने हाल के हफ्तों में कई हमले किए हैं, जिनमें सैनिकों की मौत और घायल होने की घटनाएं शामिल हैं। एक ड्रोन ने इजराइल के आयरन डोम बैटरी को भी निशाना बनाया। यूक्रेन युद्ध से प्रेरित यह तकनीक हिजबुल्लाह को सीरिया जैसे प्रायोजक खोने और ईरान पर दबाव के बावजूद खुद को फिर से हथियारबंद करने में मदद कर रही है। इजराइल अब इनके खिलाफ घूमने वाली कांटेदार तार की बाड़ जैसी नई countermeasures लगा रहा है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य
ईरान युद्ध अब तीसरे महीने में है। हालांकि युद्धविराम की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन तनाव बरकरार है। ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच स्थिरता ला सकता है, लेकिन ईरान मुद्दे पर असहमति बनी हुई है। चीन ने कहा है कि वह समानता, सम्मान और आपसी लाभ के आधार पर सहयोग बढ़ाने को तैयार है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि चीन ईरान पर प्रभावी दबाव बनाता है तो युद्ध समाप्ति में तेजी आ सकती है, अन्यथा अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता और गहरा सकती है। हिजबुल्लाह के नए ड्रोन क्षेत्रीय सुरक्षा को नई चुनौती दे रहे हैं, जो व्यापक मध्य पूर्व अस्थिरता का संकेत हैं। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार और सुरक्षा पर गहरा असर डाल रही है। आगे की घटनाएं ट्रंप-शी वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेंगी।
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