तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुरानी द्विध्रुवीयता (DMK-AIADMK) टूट चुकी है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने 2026 विधानसभा चुनाव में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा, लेकिन बहुमत (118) से 10 सीटें कम रह गईं। इस फ्रैक्चर्ड मैंडेट ने न केवल डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को तोड़ा, बल्कि एआईएडीएमके में भी दरार डाल दी। अब विजय के मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने के साथ ही उनकी सरकार AIADMK के बागी गुट और पूर्व गठबंधन सहयोगियों के समर्थन पर टिकी हुई है।
‘असोचनीय’ गठबंधन की रात: EPS के प्रतिद्वंद्वी का खुलासा
AIADMK के बागी नेता और राज्यसभा सांसद सी.वी. शनमुगम ने खुलासा किया कि चुनाव परिणामों के बाद DMK और AIADMK के बीच गठबंधन की बातचीत हुई थी। शनमुगम के मुताबिक, एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) डीएमके के समर्थन से मुख्यमंत्री बनने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पार्टी के ज्यादातर विधायकों ने इसे पार्टी की मूल विचारधारा (MGR और जयललिता की विरासत) के खिलाफ बताया। शनमुगम ने कहा, “एआईएडीएमके की स्थापना ही डीएमके को उखाड़ फेंकने के लिए हुई थी। डीएमके के साथ गठबंधन पार्टी के सिद्धांतों के विरुद्ध है।” उन्होंने 30 विधायकों (कुल 47 में से) के साथ विजय सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया। इस फैसले से एआईएडीएमके фактически दो गुटों में बंट गई है—शनमुगम-एस.पी. वेलुमणि गुट (30 MLAs) विजय के साथ, जबकि EPS के पास मात्र 17 बचे हैं। EPS के जन्मदिन पर यह विभाजन और गहरा हो गया।
हाईकोर्ट का TVK को झटका
फ्लोर टेस्ट से पहले विजय सरकार को बड़ा झटका लगा। मद्रास हाईकोर्ट ने TVK के तिरुप्पत्तूर विधायक आर. सीनिवासा सेथुपति को विधानसभा कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया। DMK के पूर्व मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन ने दावा किया कि एक पोस्टल बैलेट की गिनती नहीं हुई, जिससे सेथुपति महज एक वोट से जीते। कोर्ट ने अगले आदेश तक सेथुपति को मतदान या फ्लोर टेस्ट से दूर रखने का आदेश दिया, जिससे TVK के विधायकों की संख्या 107 रह गई है।
विजय के ज्योतिषी को सरकारी पद
विजय के निजी ज्योतिषी राधन पंडित वेट्टिवेल को तमिलनाडु सरकार में Officer on Special Duty (OSD) नियुक्त किया गया है। शपथ ग्रहण की तारीख और मुहूर्त तय करने में उनकी भूमिका अहम रही थी। यह नियुक्ति विजय के करीबी लोगों को सरकारी पदों पर लाने की शुरुआत मानी जा रही है।
कैसे खड़े हैं विजय का साम्राज्य?
विजय की TVK ने न केवल DMK को सत्ता से बेदखल किया, बल्कि उसके गठबंधन (Congress, VCK, IUML, CPI, CPI(M)) को भी तोड़ दिया। ये पार्टियां अब विजय सरकार का समर्थन कर रही हैं, जिससे उनकी संख्या बहुमत से ऊपर पहुंच गई। AIADMK के विभाजन ने भी विजय को मजबूती दी। तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव MGR और करुणानिधि-जयललिता युग के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है। डीएमके-AIADMK की दशकों पुरानी दुश्मनी अब फ्रैक्चर्ड मैंडेट और नए चेहरे के सामने बौनी साबित हो गई। विजय सरकार की स्थिरता अब बागी AIADMK विधायकों और पूर्व सहयोगियों पर निर्भर है, जबकि EPS गुट और DMK विपक्ष में मजबूत संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं। तमिलनाडु की जनता इस नए प्रयोग को कैसे देखेगी, यह आने वाले समय में साफ होगा, लेकिन फिलहाल थलपति विजय का सियासी सफर ‘ब्लॉकबस्टर’ ही साबित हो रहा है।

