म्यांमार के कुख्यात साइबर अपराध केंद्र ‘केके पार्क’ से बचाए गए तीन भारतीय युवकों की कहानी एक अजीब और चिंताजनक मोड़ पर आकर खत्म हुई। जो युवक कभी खुद साइबर गुलामी के शिकार थे, वही देश वापस लौटकर जालसाज़ बन गए और भारतीय नागरिकों को ठगने का धंधा शुरू कर दिया। पिम्परी-चिंचवड़ पुलिस ने मार्च 2026 में इन तीनों को गिरफ्तार कर इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया।
कौन हैं ये तीन आरोपी?
तीनों आरोपी नवी मुंबई, जालंधर और दार्जिलिंग के रहने वाले हैं। ये तीनों म्यांमार के म्यावाड्डी क्षेत्र में स्थित बदनाम ‘केके पार्क’ साइबर स्कैम कंपाउंड में काम करते हुए एक-दूसरे से मिले थे। पुलिस के अनुसार, तीनों ने अगस्त 2025 में सोशल मीडिया पर बैंकॉक में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी के विज्ञापन देखकर थाईलैंड की यात्रा की थी। लेकिन थाईलैंड पहुंचने के बाद उन्हें म्यांमार-थाईलैंड सीमा के पास स्थित केके पार्क कंपाउंड में ले जाया गया।
केके पार्क में क्या होता था?
कंपाउंड में इन्हें भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर विभिन्न ऑनलाइन ठगी करने पर मजबूर किया जाता था — जिसमें फर्जी शेयर ट्रेडिंग घोटाले, टास्क स्कैम, रोमांस स्कैम और डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, ये लोग कंपाउंड के अंदर बड़े कॉल सेंटर जैसे सेटअप में काम करते थे और उन्हें कड़े दबाव व सख्त निगरानी में रखते हुए बेहद कम पैसे दिए जाते थे।
बचाव के बाद फिर से अपराध की राह
तीनों को जनवरी 2026 में एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय अभियान के दौरान बचाया गया और भारत वापस लाया गया। लेकिन जांचकर्ताओं के अनुसार, साइबर धोखाधड़ी की दुनिया से बाहर निकलने की बजाय, इन्होंने वहां सीखे हुनर का इस्तेमाल करके भारत में अपना खुद का स्कैम नेटवर्क खड़ा कर लिया। भारत लौटने के बाद तीनों नेरुल में एकजुट हो गए और केके पार्क से जुड़े कुछ संदिग्धों के साथ मिलकर ऑनलाइन ठगी का काम शुरू कर दिया।
बड़े ऑपरेशन की तैयारी में थे, पहले ही पकड़े गए
जांच में पता चला कि आरोपियों ने फर्जी कारोबारी वेबसाइटें बनाने के लिए डोमेन नाम भी खरीद लिए थे और वे अपनी गतिविधियां मुंबई के पास संभवतः कर्जत इलाके में एक फार्महाउस में शिफ्ट करने की योजना बना रहे थे। एक अधिकारी के अनुसार, “वे अपराध से मिले पैसों से जगह खरीदने की योजना पर भी काम कर चुके थे, तभी हमने उन्हें पकड़ लिया।”
मामला कैसे सामने आया?
जांच की शुरुआत फरवरी 2026 के पहले हफ्ते में तब हुई जब पिम्परी-चिंचवड़ के एक व्यवसायी और उसके माता-पिता को ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग स्कैम में ₹2.1 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया गया।  पुलिस ने डिजिटल ट्रेल खंगाला तो धागा सीधे इन्हीं तीन युवकों तक पहुंचा।
पुलिस कमिश्नर की चेतावनी
पिम्परी-चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क न केवल भारतीय युवाओं का शोषण कर रहे हैं, बल्कि देश के भीतर प्रशिक्षित साइबर अपराधियों का एक पूल भी तैयार कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि: केके पार्क का काला साम्राज्य
म्यांमार के म्यावाड्डी में स्थित केके पार्क जैसे कंपाउंड बाहर से ‘टेक पार्क’ या ‘निवेश क्षेत्र’ के रूप में दिखते हैं, लेकिन वास्तव में ये चीनी आपराधिक गिरोहों द्वारा संचालित साइबर अपराध के किले हैं, जहां हथियारबंद गार्ड तैनात रहते हैं। जनवरी 2022 से मई 2024 के बीच कम से कम 29,466 भारतीय कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार और वियतनाम टूरिस्ट वीज़ा पर गए और वापस नहीं लौटे — इनमें से कई इन्हीं साइबर स्लेवरी नेटवर्क में फंसे होने की आशंका है। फिलहाल तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने उनसे जुड़े दो और सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया है। यह मामला देश में साइबर अपराध की बदलती प्रकृति की एक भयावह मिसाल बन गया है — जहां पीड़ित खुद अपराधी बनकर उभर रहे हैं।

