उत्तर प्रदेश में चल रहे योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल के नवीनतम विस्तार में गौतमबुद्ध नगर जिले को एक बार फिर प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है, जिससे नोएडा और दादरी के भाजपा विधायकों में निराशा व असंतोष की लहर दिख रही है।
कैबिनेट विस्तार में गौतमबुद्ध नगर का नाम नहीं
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अब तक लगातार हुए दो‑तीन मंत्रिमंडल विस्तार में गौतमबुद्ध नगर से किसी विधायक को मंत्रीपद नहीं दिया गया है, जबकि यह जिला राजधानी के निकटतम औद्योगिक‑आवासीय हब होने के साथ‑साथ राजनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक, हाल के विस्तार में मेरठ, अलीगढ़, ऊंचाहार और अन्य क्षेत्रों के नेता तो शामिल हुए, लेकिन नोएडा, दादरी और जेवर के बीजेपी विधायकों के नाम किसी भी सूची में नहीं दिखे।
जातीय‑क्षेत्रीय समीकरण की रणनीति
सरकार की तरफ से यह विस्तार मुख्य रूप से गुर्जर‑जाट, वाल्मीकि, विश्वकर्मा, पासी और ब्राह्मण समाज के बीच समीकरण बनाने के लिए तैयार किया गया माना जा रहा है। मेरठ से आने वाले राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार मंत्री का दर्जा दिया गया, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जिसे जाट समाज के साथ‑साथ ब्राह्मण व अन्य वर्गों को स्वीकृति दिलाने की रणनीति माना जा रहा है।
नोएडा‑ग्रेटर नोएडा में निराशा
जिला भाजपा के कई नेता और स्थानीय पदाधिकारी मानते हैं कि नोएडा‑ग्रेटर नोएडा क्षेत्र ने बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ा ‘वोटबैंक’ उपलब्ध कराया, फिर भी यहां के विधायकों को मंत्रिमंडल में न तो जगह मिली और न ही उन्हें कोई विशेष जिम्मेदारी दी गई। कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियां इसे सरकार की ‘रंगाई‑पुताई’ और निर्वाचन पूर्व जात‑क्षेत्रीय खिलाड़ी खेलने की नीति बता रही हैं और यह दावा कर रही हैं कि इससे जिले के लोगों की असली समस्याएं नहीं सुलझेंगी।
राजनीतिक संकेत और आगे की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार जात‑क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने पर फोकस कर रही है, जिसके तहत गौतमबुद्ध नगर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों की ओर अभी सीधी नजर नहीं डाली गई है। विपक्ष दावा कर रहा है कि नोएडा‑दादरी के निराश विधायकों को भविष्य में संगठन के रूप से मजबूत करने की कोशिश की जाएगी, ताकि अगले चुनाव में यह जिला कांग्रेस या सपा के लिए अहम गढ़ न बन सके।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी का स्वदेशी अपील, क्या अच्छे दिन की जगह आ गया बुरे दिन?

