बॉलीवुड कमेडियन कपिल शर्मा अभिनीत हिंदी फीचर फिल्म ‘दादी की शादी’ सिनेमाघरों में उतरी है और रिव्यू मिल रहे हैं। शुरुआती प्रमोशन से यह आशा जाग्रत हुई थी कि यह बूढ़ी उम्र में दोबारा प्यार ढूंढने और अकेलेपन पर एक ताज़ा, दिल छू लेने वाली कहानी होगी। मगर critical reviews के मुताबिक, फिल्म इस वादे से बहुत दूर निकली और एक लंबे, खिंचे हुए टीवी सिरियल जैसा अहसास दिलाती है।
कहानी क्या है?
फिल्म की शुरुआत एक रोचक प्रॉम्प्ट से होती है: शिमला में रहने वाली बुजुर्ग माता (नीतू कपूर) की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट से यह अफवाह फैल जाती है कि वह गुप्त रूप से दोबारा शादी करने वाली हैं । यह खबर उनके दूर रहने वाले बच्चों में सनसनी फैला देती है। शॉक्ड और थोड़ा शर्मिंदा महसूस करने वाले बच्चे अपने-अपने परिवारों के साथ उनकी दहलीज पर उपस्थित होते हैं। लेकिन चूंकि वे सालों बाद एक साथ मिले हैं, माता झूठ को आगे बढ़ाती रहती है ताकि बच्चे थोड़ी देर और उसके आसपास रहें। एक Other बुजुर्ग पुरुष (ठीरन देवराजन) को ‘फेक बॉयफ्रेंड’ के तौर पर प्लान्ट किया जाता है, और फिर गलत पहचानों, अराजकता, भावनात्मक सामना, ईर्ष्या और पारिवारिक ड्रामे की एक श्रृंखला शुरू होती है । रेडिफ की रिपोर्ट के मुताबिक, झूठ जारी रखने का कारण यह है कि इससे पहली बार उसे अपने वरिष्ठ spelers से अलग-थलग बच्चों के साथ समय बिताने का बहाना मिलता है।
रिव्यू में मुख्य समस्याएँ
टीवी सिरियल जैसा अहसास: समीक्षकों का कहना है कि फिल्म का अत्यधिक ड्रामेटिक टोन इसे फिल्म के बजाय “कभी खत्म न होने वाले टीवी सिरियल” जैसा बना देता है। परिवार के सामना, ड्रामेटिक पॉज़ और “सब लिविंग रूम में इकट्ठा होते हैं” वाले पल खिंचे हुए ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’ ट्रैक जैसे लगते हैं।
प्रीची और ओवरलॉन्ग: फिल्म का वादा किया गया ताज़ा विचार “प्रीची मेलोड्रामा और इमोशनल ओवरकिल” से वजनदार हो जाता है । फिल्म बार-बार इस विचार पर वापस आती है कि बच्चे अपने माता-पिता की sacrifics भूल जाते हैं ।
सीन जो दर्शक को भी फ्रस्ट्रेट करें: फिल्म के अंतिम क्षणों में, एक प्रमुख पात्र चिल्लाता है — “Sidhe sidhe bhi toh bol sakti thi” (तुम सीधे भी तो बोल सकती थीं) । यह पल दर्शक की अपनी फ्रस्ट्रेशन को दर्शाता है।
कॉस्टिंग और रोमांस पर सवाल: रेडिफ के रिव्यू में कपिल शर्मा का सादिया खातेब के साथ कॉस्टिंग “समस्याग्रस्त” बताया गया है due to significant age gap और रोमांस का पुराना अंदाज़ ।
सकारात्मक पक्ष
सोशल रिलेवल कॉन्सेप्ट: हिंदी सिनेमा में बुजुर्गों की भावनात्मक अकेलेपन और companionship पर बात करना दुर्लभ है, और ‘दादी की शादी’ का प्रॉम्प्ट वाकई में दिलचस्प और socially fresh है ।
नीतू कपूर की परफॉरमेंस: टाइम्स ऑफ इंडिया के रिव्यू में कहा गया है कि नीतू कपूर फिल्म में गर्माहट जोड़ती हैं, भले ही फिल्म flawed हो ।
पारिवारिक ड्रामे की पहचान: यह फिल्म ‘बाघबन’ और ‘ओम जय जगदीश’ जैसी क्लासिक फमिली रीयूनियन ड्रामा की याद दिलाती है ।
वरिडिक्ट
टाइम्स प्राइम के मुताबिक, ‘दादी की शादी’ एक वादा करने वाली पारिवारिक कॉमेडी-ड्रामा है जिसका सबसे strong हिस्सा इसका कॉन्सेप्ट है दादी की दोबारा शादी laughter, फैमिली पैनिक, इमोशनल जजमेंट और अकेलेपन व दूसरे मौके पर महत्वपूर्ण बातचीत के लिए जगह बनाती है । लेकिन इंडिया टुडे का कहना है कि फिल्म अपने वादे से विचलित होकर एक stretched TV serial में बदल जाती है । टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे 3.0/5 का रेटिंग दिया है, इसे “flawed पर feel-good family drama” बताते हुए। ‘दादी की शादी’ का कॉन्सेप्ट ताज़ा और socially relevant है, लेकिन execution में excess melodrama और खिंचाव ने इसे एक संभावित हिट से वंचित कर दिया है। जो दर्शक पारिवारिक ड्रामा जूलस पसंद करते हैं, वे इसे देख सकते हैं, लेकिन जो ताज़ा storytelling उम्मीद कर रहे थे, उन्हें निराशा हो सकती है।
रिलीज़ तिथि: 8 मई 2026 मुख्य कलाकार: कपिल शर्मा, नीतू कपूर, सादिया खातेब, ठीरन देवराजन समीक्षा संक्षेप: “वादा करता कॉन्सेप्ट, मगर प्रीची ड्रामे में तब्दील हुई बाज़ी”
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