उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में दशकों से पिछड़ेपन और ऊर्जा संकट से जूझते बांदा जिले के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी आई है। बुंदेलखंड में बांदा सहित कई जिलों में 30,000 करोड़ रुपये की 29 बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिनमें से दस परियोजनाएं सौर ऊर्जा से जुड़ी हैं। इसी कड़ी में बांदा में लगभग 2800 करोड़ रुपये के सौर (सोलर) और गैस आधारित परियोजनाओं की स्थापना की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जो इस क्षेत्र को उत्तर प्रदेश का ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
बांदा में क्या होगा?
बांदा में अवाडा इंड सोलर प्राइवेट लिमिटेड 350 करोड़ रुपये की लागत से 750 मेगावाट सोलर पावर प्रोजेक्ट स्थापित करेगी। इसके अलावा सनश्योर सोलर पार्क प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 62 करोड़ रुपये की लागत से 15 मेगावाट का सोलर पावर प्रोजेक्ट भी स्थापित किया जा रहा है। ये परियोजनाएं मिलकर जिले की ऊर्जा ज़रूरतों को न केवल पूरा करेंगी, बल्कि अतिरिक्त बिजली को राज्य के ग्रिड में भेजा जाएगा। इसके साथ ही गैस आधारित परियोजना भी इस पैकेज का हिस्सा है, जो सौर ऊर्जा के साथ मिलकर एक समन्वित ‘हाइब्रिड एनर्जी मॉडल’ तैयार करेगी। इससे बांदा में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की संभावना बनेगी।
बुंदेलखंड — सौर ऊर्जा की असीम संभावनाएं
बुंदेलखंड में वर्तमान में 4,000 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं क्रियान्वयन के अलग-अलग स्तरों पर हैं। इसमें चित्रकूट में 800 मेगावाट की परियोजना निर्माणाधीन है, जिससे निकलने वाली ऊर्जा भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के जरिए निकाली जाएगी। बुंदेलखंड में सबसे बड़े पावर प्रोजेक्ट के रूप में एनटीपीसी की सहायक कंपनी एनटीपीसी आरईएल द्वारा 3,200 करोड़ रुपये की लागत से 630 मेगावाट का बरेठी सोलर पावर प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिससे लगभग 3 लाख घरों को बिजली मिलने की संभावना है। इसी क्षेत्र में टुस्को लिमिटेड द्वारा झांसी में 600 मेगावाट, ललितपुर में 600 मेगावाट और चित्रकूट में 800 मेगावाट के तीन बड़े सोलर पार्क भी तैयार किए जा रहे हैं।
देश का पहला सोलर एक्सप्रेसवे — बांदा भी जुड़ेगा
योगी सरकार बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को देश के पहले सोलर एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित कर रही है। 296 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के दोनों किनारों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे 550 मेगावाट सोलर बिजली उत्पन्न होगी। यह एक्सप्रेसवे बांदा सहित सात जिलों चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा — से होकर गुजरता है।
यूपी में ग्रीन एनर्जी क्रांति — राज्य सरकार की मंशा साफ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यूपी नेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गोरखपुर में टोरेंट पावर द्वारा 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जबकि रामपुर में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता वाला ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।
रोज़गार और विकास का नया द्वार
सोलर प्लांट के निर्माण से स्थानीय रोजगार के कई नए अवसर उत्पन्न होंगे। अकेले बरेठी प्लांट से लगभग 450 लोगों को प्रत्यक्ष और करीब 500 युवाओं को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। बांदा सहित पूरे बुंदेलखंड में इन परियोजनाओं से हज़ारों की संख्या में युवाओं को रोज़गार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र सरकार का भी समर्थन
भारत सरकार इन परियोजनाओं में 33 प्रतिशत यानी करोड़ों रुपये कैपिटल ग्रांट के रूप में दे रही है, वहीं 20 प्रतिशत राज्य सरकार पूंजी इक्विटी के रूप में लगाएगी। इसके अलावा जर्मनी की संस्था केएफडब्ल्यू से ऋण लेकर इसे कार्यान्वित किया जाएगा। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के अंतर्गत 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट भारत सरकार ने मंजूर किए हैं।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन और सौर परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे प्रदेश में हरित ऊर्जा निवेश बढ़ेगा और आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उल्लेखनीय है कि बांदा और बुंदेलखंड का यह क्षेत्र वर्षों से सूखा, पलायन और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता रहा है। अब उसी धरती पर सूरज की तेज़ धूप को ऊर्जा में बदलने की यह महायोजना न केवल इस क्षेत्र की तकदीर बदलने का वादा करती है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को हरित ऊर्जा के मानचित्र पर स्थापित करने की नींव भी रख रही है।

