राजन जी महाराज का भावुक बयान, ‘रघुनाथ जी की बड़ी कृपा’, बंगाल चुनाव परिणाम से कथा पंडाल में सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में चल रही राम कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक राजन जी महाराज ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने भगवान राम के प्रसंगों को वर्तमान राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि जो राम का विरोध करते हैं, जनता उन्हें सबक सिखाती है।

कथा में सियासी टिप्पणी

राम कथा के पंडाल में व्यासपीठ से राजन जी महाराज ने बंगाल की ‘दुर्दशा’ पर चिंता जताई। रावण और कंस के पतन का उदाहरण देते हुए बोले, “बंगाल में चुनाव का रिजल्ट आया है। बड़ी कृपा हुई रघुनाथ जी की। आप लोग तो वहां रहते नहीं, हम रहते हैं। वहां की हालत जानते हैं।” उन्होंने हिंसा और धर्म-अनदेखी की घटनाओं का जिक्र किया, हालांकि किसी पार्टी का नाम नहीं लिया। हजारों श्रद्धालुओं के बीच यह बयान चर्चा का केंद्र बना। लोग इसे बीजेपी की कथित जीत और टीएमसी के 15 साल के शासन के अंत से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

बीजेपी नेताओं ने महाराज के बयान का स्वागत किया। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “धार्मिक गुरु जनता की भावनाओं को समझते हैं। बंगाल में हिंसा खत्म हुई, यह राम कृपा है।” दूसरी ओर, टीएमसी समर्थक इसे ‘सियासी हस्तक्षेप’ बता रहे हैं। महुआ मोइत्रा ने चुनाव हार पर ट्वीट किया, “जनता ने बीजेपी चुनी, हम सम्मान करते हैं, लेकिन असमान पिच पर लड़े।” कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुप्पी साधी है, लेकिन आंतरिक चर्चाओं में इसे ‘बीजेपी प्रचार’ कहा जा रहा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है।

जनता की राय

सड़कों पर बातचीत में कोलकाता के लोग बंटे हुए हैं। एक दुकानदार बोला, “हिंसा से त्रस्त थे, बदलाव जरूरी था। महाराज सही कह रहे।” वहीं, एक युवा ने विरोध जताया, “कथा में राजनीति नहीं घुसनी चाहिए।” गोंडा में श्रद्धालु उत्साहित हैं, “महाराज बिहार-बंगाल से हैं, उनकी बात सच्ची लगती है।” सोशल मीडिया पर #RajanJiMaharaj ट्रेंड कर रहा है।

पृष्ठभूमि और ताजा अपडेट

राजन जी महाराज का जन्म बिहार के सिवान में, शिक्षा कोलकाता में हुई। वे अक्सर विवादों में रहते हैं, जैसे गोरखपुर कथा में ‘गोली मारो’ बयान। आज (6 मई 2026) तक बंगाल में बीजेपी सरकार गठन की प्रक्रिया तेज, ममता बनर्जी ने हार स्वीकारी लेकिन ‘षड्यंत्र’ का आरोप लगाया। यह घटना धार्मिक और राजनीतिक मेल को उजागर करती है, जहां कथा पंडाल सियासत का अखाड़ा बन गया।

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