ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी के सेक्टरों में भूखंड विवादों को जड़ से सुलझाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने नई पहल की है। प्राधिकरण अब उन किसानों को जहां वे काबिज हैं, वहीं भूखंड देने की नीति पर काम करेगा। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। हालांकि, यह नियम केवल आबादी के नजदीक पेरीफेरी रोड के अंदर नियोजित भूखंडों पर ही लागू होगा।
बुधवार को सीईओ से मिलने पहुंचे किसानों ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि वे अपने पुरखों की स्मृतियों से जुड़ी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं और मांग की कि सात प्रतिशत आबादी भूखंड उन्हें उसी जगह पर दिया जाए जहां वे वर्षों से काबिज हैं। एक काश्तकार ने बताया कि वह अपना पैतृक घर किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहते। सीईओ ने अधिकारियों को ऐसे किसानों को चिह्नित करने और उनकी मांग के अनुसार काबिज जमीन पर ही भूखंड नियोजित करने के निर्देश दिए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इससे सेक्टरों की समग्र योजना प्रभावित न हो।
अधिकारियों के मुताबिक ऐसे कई मामले हैं जिनमें काश्तकारों के काबिज रहने के कारण उन्हें दूसरी जगह आबादी भूखंड नहीं मिल सका और साथ ही सेक्टरों में औद्योगिक व आवासीय भूखंडों की जमीन भी अटकी पड़ी है। यदि काश्तकार काबिज जगह पर ही सात फीसदी भूखंड लेकर सहमति दे दें तो एक साथ कई विवाद सुलझ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि बोर्ड द्वारा पूर्व में स्वीकृत प्रस्ताव में भी किसान की सहमति से आबादी के पास 10 प्रतिशत जमीन पर सात प्रतिशत भूखंड विकसित करने का प्रावधान पहले से मौजूद है।

