राजीव गांधी हत्याकांड का दोषी बना वकील: रजिव गांधी की हत्या के मामले में 31 साल जेल काट चुके लेफ्टिनेंट ए.जी. पेरारिवलन को तमिलनाडु बार काउंसिल ने हाईकोर्ट में वकालत करने की मान्यता प्रदान कर दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिसंबर 2022 में उनके खिलाफ दया याचिका को मंजूरी दिए जाने के बाद यह नया अध्याय शुरू हुआ है। पेरारिवलन ने बार काउंसिल परीक्षा उत्तीर्ण कर वकील बनने का सपना पूरा किया, जो अब न्यायिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता का प्रतीक बन गया है।
पेरारिवलन, जो लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) से जुड़े होने के कारण 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री रजिव गांधी की हत्या की साजिश रचने के दोषी ठहराए गए थे, ने जेल में रहते हुए कानून की पढ़ाई पूरी की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में SC/ST एक्ट के तहत ‘रिहा करने योग्य’ घोषित किए जाने के बावजूद वे 2022 तक जेल में रहे। दया याचिका स्वीकृति के बाद रिहा होते ही उन्होंने वकील बनने की तैयारी तेज कर दी। तमिलनाडु बार काउंसिल ने हाल ही में उनकी अर्हता प्रमाणित की, जिसके तहत वे अब मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर सकेंगे।
सूत्रों के अनुसार, पेरारिवलन ने जेल से रिहाई के बाद चेन्नई में रहते हुए बार एग्जाम की तैयारी की और इसे सफलतापूर्वक पास किया। बार काउंसिल के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा, “उनकी योग्यता सत्यापित हो चुकी है और आधिकारिक मान्यता जारी कर दी गई है।” यह घटना तमिलनाडु की राजनीति में भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां DMK सरकार ने पहले ही राज्यपाल आर.एन. रवि के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी AIADMK ने इसे ‘न्याय का अपमान’ बताते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से पुनर्विचार की मांग की है।
पेरारिवलन के वकील बनने से जुड़ी यह खबर पर ताजा अपडेट्स के मुताबिक, वे अब मानवाधिकार और जेल सुधार से जुड़े मामलों पर फोकस करने की बात कह रहे हैं। LTTE से जुड़े अन्य दोषियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच यह विकास राजनीतिक विवाद को हवा दे सकता है। पेरारिवलन ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “न्याय की लड़ाई अब अदालत के अंदर से जारी रहेगी।” कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला दया याचिका प्रक्रिया और कैदियों के पुनर्वास पर नई बहस छेड़ सकता है। तमिलनाडु सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।

