लोहिया संस्थान का विवादित आदेश: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) का एक आदेश इन दिनों विवाद में है। संस्थान प्रशासन ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हेयरस्टाइल और ड्रेस कोड को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं, और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
क्या है मामला?
लोहिया संस्थान में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर यह नया नियम लागू किया गया है जिसमें उनके पहनावे और बालों की स्टाइल तक तय कर दी गई है। नियमों का पालन न करने पर वेतन से जुर्माना काटे जाने का आदेश जारी किया गया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि ये नियम विशेष रूप से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर लागू किए गए हैं, जबकि स्थायी कर्मचारियों के लिए ऐसी कोई सख्त व्यवस्था नहीं दिखती।
दोहरे मापदंड का आरोप
कर्मचारी संगठनों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस आदेश को भेदभावपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी पहले से ही कम वेतन, नौकरी की अनिश्चितता और सीमित अधिकारों से जूझ रहे हैं। ऐसे में हेयरस्टाइल जैसे व्यक्तिगत पहलुओं पर जुर्माना लगाना उनकी गरिमा के साथ खिलवाड़ है। यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी लोहिया संस्थान में दवा चोरी के मामले में स्थायी कर्मचारियों को बचाते हुए केवल एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी को काम से रोका गया था।
व्यापक पृष्ठभूमि
यह मामला उस बड़े संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसमें देशभर में सरकारी संस्थाएं ड्रेस कोड नीतियां लागू कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों के लिए जींस-टी-शर्ट पर प्रतिबंध लगाया, और हरियाणा के रोहतक में भी सचिवालय कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड जारी हुआ। लेकिन इन सभी मामलों में जुर्माना लगाने का प्रावधान नहीं था।
सवाल जो उठते हैं
इस विवाद ने कुछ बुनियादी सवाल खड़े किए हैं — क्या किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान को कर्मचारियों की व्यक्तिगत बनावट पर नियंत्रण रखने का अधिकार है? क्या आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ यह व्यवहार श्रम कानूनों की भावना के अनुकूल है? और सबसे महत्वपूर्ण — क्या यह नियम स्थायी व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है? संस्थान प्रशासन का कहना है कि यह कदम अनुशासन और पेशेवर वातावरण बनाए रखने के लिए उठाया गया है। लेकिन कर्मचारी वर्ग इसे अपने अधिकारों पर हमला मान रहा है।

