नोएडा मजदूर हिंसा साजिश: नोएडा में 13 अप्रैल को मजदूरों के वेतन वृद्धि के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ अब एक सुनियोजित साजिश का रूप ले चुकी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं, जिसमें बाहरी तत्वों द्वारा श्रमिकों को उकसाने, भड़काऊ पर्चे बांटने और सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने की बात सामने आ रही है। आज (21 अप्रैल 2026) की ताजा जानकारी के मुताबिक, नोएडा पुलिस ने इस मामले में दो और बड़े आरोपी गिरफ्तार किए हैं। ये हैं:
हिमांशु (यूट्यूबर): दिल्ली के शालीमार बाग से गिरफ्तार। मूल रूप से उत्तराखंड के उधम सिंह नगर का रहने वाला। मजदूर मुद्दों पर यूट्यूब पर सक्रिय था और पीएचडी की तैयारी कर रहा था। घटना वाले दिन नोएडा में मौजूद था।
सत्यम वर्मा (पत्रकार): लखनऊ के निशातगंज से गिरफ्तार। एक पत्रिका के संपादक और वैचारिक लाइब्रेरी चलाने वाले। दोनों आरोपी मास्टरमाइंड आदित्य आनंद (सॉफ्टवेयर इंजीनियर, तमिलनाडु से 18-19 अप्रैल को STF द्वारा गिरफ्तार) से लगातार संपर्क में थे। पुलिस को हिमांशु के ठिकाने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और पिछले एक महीने से इस्तेमाल हो रहे भड़काऊ पर्चे बरामद हुए हैं, जिनसे श्रमिकों को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने पुष्टि की कि ये दोनों पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से जुड़े थे और साजिश में गहरी भूमिका निभा रहे थे। जांच में पता चला है कि हिंसा सामान्य मजदूर आंदोलन नहीं, बल्कि शहर का माहौल बिगाड़ने की बड़ी साजिश थी।
पुलिस की अब तक की कार्रवाई:
कुल 13 FIR दर्ज। 62 से 396 लोगों की गिरफ्तारी (विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार)। कई गिरफ्तार लोग असली मजदूर नहीं थे। पाकिस्तान से संचालित दो X (ट्विटर) हैंडल के जरिए VPN से अफवाहें फैलाई गईं – यह पहलू भी जांच के दायरे में है। यूपी सरकार के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इसे “बड़ी साजिश” बताया और विकास विरोधी ताकतों का जिक्र किया।
प्रशासनिक बदलाव: घटना के बाद सेंट्रल नोएडा जोन की डीसीपी शैव्या गोयल और एसीपी उमेश यादव को हटाया गया। नई जिम्मेदारी डीसीपी यातायात शैलेन्द्र सिंह और एसीपी दीक्षा सिंह को सौंपी गई। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की छानबीन कर रही है। SIT की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। नोएडा में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन साजिश की जड़ें गहरी निकल रही हैं।

