इजरायल-लेबनान में थमी गोलीबारी, ट्रंप के एलान के बाद बढ़ी शांति की उम्मीद

Israeli:

Israeli: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का ऐलान किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई घोषणा के बाद गुरुवार से दक्षिणी लेबनान में संघर्ष विराम लागू हो गया है। हालांकि, हिजबुल्ला की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक सहमति सामने नहीं आई है।

Israeli:

इजरायली मीडिया के मुताबिक, सेना के हवाले से जानकारी दी गई है कि सीमावर्ती इलाकों में फिलहाल शांति बनी हुई है। लेकिन जमीन पर स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। इससे पहले लेबनान के राष्ट्रपति जोसफ औन ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीधी बातचीत करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हिजबुल्ला के साथ युद्धविराम नहीं होता, तब तक किसी भी स्तर की वार्ता संभव नहीं है।

Israeli:

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बातचीत में भी लेबनानी पक्ष ने यही रुख दोहराया। वहीं, अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से युद्धविराम को पूर्व शर्त के रूप में समर्थन नहीं दिया है, जबकि इजरायल इस वार्ता को हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण से जोड़कर देख रहा है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच 34 साल बाद शीर्ष स्तर की वार्ता की कोशिश की जा रही थी, लेकिन यह पहल शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गई। इससे पहले वॉशिंगटन में दोनों देशों के बीच राजदूत स्तर की बातचीत भी हो चुकी है, जिसका हिजबुल्ला ने विरोध किया था।

इस बीच, इजरायल ने साफ किया है कि वह ईरान समर्थित हिजबुल्ला के खिलाफ अभियान जारी रखेगा। अब तक इस संघर्ष में 2,196 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 12 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। इजरायली सेना ने लेबनान की लिटानी नदी पर स्थित अहम पुल को भी ध्वस्त कर दिया है और 70 ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं, हिजबुल्ला ने भी 24 घंटे में 39 सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया है। दूसरी ओर, क्षेत्रीय तनाव के बीच चीन ने भी हस्तक्षेप करते हुए ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल रखने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से बातचीत में कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना वैश्विक हित में है। फिलहाल युद्धविराम से हालात में अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों के बीच ठोस और व्यापक समझौते की जरूरत बनी हुई है।

Israeli:

यहां से शेयर करें