Uproar over women’s reservation bill in Parliament’s special session: लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 करने और 33% आरक्षण के तीन विधेयक पेश

Uproar over women’s reservation bill in Parliament’s special session: 16 अप्रैल 2026 को संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए। इनमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने, लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 करने (राज्यों के लिए 815 और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 35) तथा परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया से संबंधित संशोधन शामिल हैं।0

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ये विधेयक सदन में पेश किए। बिल पेश होते ही कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने विरोध जताया और सदन में हंगामा हो गया। स्पीकर ने पहले सिंगर आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया। चर्चा 18 अप्रैल तक चलेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 3 बजे सदन को संबोधित करेंगे।

बिल की मुख्य बातें

2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से ही 33% महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव। लोकसभा में कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। परिसीमन प्रक्रिया जनगणना के आधार पर होगी (सरकार 2011 जनगणना या नई प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रही है)। सीटों में रोटेशन सिस्टम से आरक्षण लागू होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त करेगा और लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। पीएम मोदी ने पहले सभी दलों से सर्वसम्मति की अपील की थी और महिलाओं को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन मांगा था।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दल (कांग्रेस, सपा, डीएमके आदि) बिल का विरोध कर रहे हैं। उनकी मुख्य आपत्तियां: परिसीमन को “छल-कपट” और “भाजपा की कुटिल राजनीति” बताया जा रहा है, जो दक्षिण भारत और कुछ राज्यों (जैसे पंजाब) को नुकसान पहुंचा सकता है। ओबीसी, दलित और आदिवासी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग। पहले जनगणना पूरी करने की मांग, बिना इसके बिल को “चुनावी स्टंट” करार दिया।अखिलेश यादव, राहुल गांधी, जयराम रमेश, एमके स्टालिन आदि ने बिल को सत्ता कब्जाने की साजिश बताया। कुछ नेताओं ने बिल की कॉपी जलाने और काला झंडा फहराने जैसी नारेबाजी की। भाजपा और सहयोगी दल इसे “ऐतिहासिक” बता रहे हैं और कह रहे हैं कि आधी आबादी को उनका हक मिलेगा।

पृष्ठभूमि

2023 में संसद ने मूल नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था, लेकिन उसका क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन पर निर्भर था। अब सरकार इसे 2029 चुनावों से पहले लागू करने के लिए संशोधन लाई है ताकि देरी न हो। बिल अभी चर्चा के चरण में है और पास होना बाकी है। सदन में बहस जारी है, जिसमें महिला सशक्तिकरण बनाम क्षेत्रीय असमानता का मुद्दा प्रमुख है। यह विकास भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि विवाद के कारण अंतिम नतीजा 18 अप्रैल तक स्पष्ट होगा।

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