बिहार में ‘सम्राट युग’ की शुरुआत: 20 साल बाद बीजेपी सम्राट, JD(U) के दो डिप्टी CM लेंगे शपथ; NDA समीकरण बदला, विपक्ष ने सवाल उठाए

बिहार में ‘सम्राट युग’ की शुरुआत: बिहार की राजनीति में आज ऐतिहासिक बदलाव हुआ। भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने लोकभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए। वे बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं। शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सम्राट चौधरी के साथ जनता दल (यूनाइटेड) से दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ लेंगे विजय चौधरी और विजेंद्र यादव। पूर्ण मंत्रिमंडल का विस्तार बाद में होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह में शामिल होने वाले हैं।

कैसे हुआ यह बड़ा सियासी बदलाव?
मंगलवार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया और कैबिनेट भंग कर दी। इसके तुरंत बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। एनडीए विधायक दल की बैठक में भी उन्हें समर्थन मिला। नीतीश कुमार ने खुद सम्राट को माला पहनाकर समर्थन जताया और कहा कि नई सरकार को पूरा सहयोग देंगे।

राजनीतिक समीकरण में क्या बदला?

NDA का नया चेहरा: अब तक JD(U) के नेतृत्व वाली सरकार थी, लेकिन अब भाजपा सीधे सत्ता की कमान संभाल रही है। गठबंधन बरकरार है, लेकिन BJP का वर्चस्व साफ दिख रहा है।

जातीय समीकरण: सम्राट चौधरी कुर्मी/कोईरी (लव-कुश) समुदाय से हैं। भाजपा ने पिछड़े वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस फैसले को चुना। यह 36 साल बाद बिहार में ‘चौधरी’ मुख्यमंत्री बनने का भी प्रतीक है।

भविष्य का प्रभाव: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी स्वतंत्र ताकत दिखा दी। JD(U) का भविष्य अब सम्राट सरकार पर निर्भर है। कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि JD(U) का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

सम्राट चौधरी का संकल्प और प्रतिक्रियाएं
शपथ से पहले सम्राट चौधरी ने कहा, “बिहार को विकास, सुशासन और समृद्धि के नए आयाम तक ले जाऊंगा।” उन्होंने नीतीश कुमार की विरासत को संभालने का भी संकेत दिया।

प्रमुख प्रतिक्रियाएं:

नीतीश कुमार: “नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग रहेगा।”

तेजस्वी यादव (RJD): सम्राट चौधरी की शैक्षणिक डिग्री पर सवाल उठाए। कहा, “नीतीश कुमार ने BJP-RSS को बढ़ावा दिया, इसलिए इस्तीफा देना पड़ा।” आरजेडी ने इसे “BJP का कब्जा” बताया।

भाजपा नेतृत्व: इसे “सोने का अध्याय” और “सम्राट युग” की शुरुआत करार दिया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्राट के नाम का ऐलान किया।

अन्य: विपक्ष ने इसे “सत्ता का खेल” बताया, जबकि NDA में उत्साह है।

क्या होंगे बदलाव?

नीतिगत: सुशासन और विकास पर जोर जारी रहेगा, लेकिन भाजपा की प्राथमिकताएं (जैसे राम मंदिर प्रतीक, हिंदुत्व एजेंडा, केंद्र की योजनाएं) तेज होंगी।

सत्ता संतुलन: JD(U) को डिप्टी CM पद देकर गठबंधन बचाया गया, लेकिन असली ताकत अब भाजपा के पास।

चुनावी रणनीति: 2027 से पहले भाजपा बिहार में अपनी छाप मजबूत करना चाहती है।

यह बदलाव बिहार की 20 साल पुरानी ‘नीतीश राजनीति’ का अंत और ‘सम्राट युग’ की शुरुआत माना जा रहा है। शपथ समारोह के बाद नई सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार और एजेंडा जल्द सामने आएगा। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह बदलाव 2027 चुनावों की दिशा तय करेगा। शपथ ग्रहण समारोह अभी जारी है। आगे की जानकारी के साथ खबर अपडेट की जाएगी।

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