अंबेडकर जयंती: आज डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के साथ ही वैशाखी (बैसाखी) पर्व भी मनाया जा रहा है। इस दुर्लभ संयोग ने पूरे देश में सामाजिक-धार्मिक उत्साह का माहौल बना दिया है। आम जनमानस से लेकर राजनीतिक नेताओं तक ने बाबासाहेब के समानता, न्याय और संविधान के संदेश को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि वैशाखी के मौके पर पंजाबी संस्कृति की धूम रही। देशभर में शोभा यात्राएं (जुलूस), झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है।
नेताओं की प्रतिक्रिया:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “उनके राष्ट्र-निर्माण के प्रयास प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन हमें समानता और प्रगति की दिशा में प्रेरित करता है।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और अन्य शीर्ष नेता संसद भवन परिसर में उनके प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘भीम ज्योति उत्सव-2026’ में हिस्सा लिया और कहा कि बाबासाहेब के आदर्शों पर चलकर ही समावेशी भारत का निर्माण संभव है। विपक्षी दलों के नेता भी इस अवसर पर एकजुट नजर आए। बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) ने लखनऊ में पोस्टरों और बैनरों से शक्ति प्रदर्शन किया।
आम जनमानस और जगह-जगह जुलूस-झांकियां:
दिल्ली: राजधानी में 10 से 14 अप्रैल तक ‘भीम ज्योति उत्सव-2026’ चल रहा है। आज रामलीला मैदान पर सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक जनसभा के बाद भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जो अंबेडकर भवन (पहाड़गंज) तक पहुंची। झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संविधान मेले का आयोजन हुआ। यातायात पुलिस ने JLN मार्ग, आसफ अली रोड, अजमेरी गेट समेत कई इलाकों में डायवर्जन लगाए।
हरियाणा: यमुनानगर में 12 अप्रैल को ही भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें बाबासाहेब की जीवन झांकियां शामिल थीं। कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय बैसाखी महोत्सव शुरू हो चुका है, जहां नृत्य, लोक गीत और पगड़ी सजावट का माहौल है। वैशाखी के जुलूस (नगर कीर्तन) में सिख समुदाय सक्रिय है।
उत्तर प्रदेश: लखनऊ में BSP ने ‘लखनऊ चलो’ का आह्वान किया, जहां अंबेडकर स्मारक पर भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। कानपुर के एक स्कूल में बैसाखी और अंबेडकर जयंती को साथ मनाया गया—छात्रों ने पंजाबी नृत्य और झांकियां प्रस्तुत कीं। कई गांवों और कस्बों में स्थानीय स्तर पर जुलूस निकाले गए।
अन्य राज्यों में: महाराष्ट्र के नागपुर (दीक्षाभूमि) और मुंबई में पारंपरिक रैलियां और सभाओं का आयोजन। उत्तराखंड के सभी स्कूलों में विशेष कार्यक्रम। स्कूल-कॉलेजों में छात्रों ने बाबासाहेब के विचारों पर चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रम किए।
जनता की प्रतिक्रिया:
सामान्य नागरिकों में खासा उत्साह दिख रहा है। सोशल मीडिया पर #AmbedkarJayanti और #Vaisakhi2026 ट्रेंड कर रहे हैं। कई जगहों पर दोनों त्योहारों को एक साथ मनाया जा रहा है, जैसे पंजाबी लोक संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों को जोड़ते हुए। लोग कह रहे हैं कि यह संयोग सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। बैंक, स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहने से आम लोगों को भी उत्सव मनाने का पूरा मौका मिला। देशभर में शांति और उल्लास का माहौल है। बाबासाहेब के ‘शिक्षा, संगठन और संघर्ष’ के मंत्र के साथ वैशाखी की खुशियों ने आज पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध दिया है। जय भीम! जय वैशाखी!

