भारत रत्न की आवाज़ हमेशा के लिए हुई खामोश: भारतीय संगीत जगत की अमर आवाज़, लेजेंडरी पार्श्वगायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। उन्होंने रविवार (12 अप्रैल) को ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहाँ उन्हें अत्यधिक थकान और छाती में संक्रमण के कारण भर्ती किया गया था। अस्पताल के डॉ. प्रतीत सामदानी ने ANI को बताया कि उनकी मृत्यु मल्टी-ऑर्गन फेलियर (बहु-अंग विफलता) के कारण हुई।
अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार
परिवार की ओर से जारी सूचना के अनुसार, अंतिम दर्शन आज सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक Casa Grande Tower A, सेनापति बापट मार्ग, लोअर परेल स्थित उनके आवास पर आयोजित किए गए। इसके बाद सोमवार 13 अप्रैल को शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार निर्धारित है। उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। AR Rahman, सचिन तेंदुलकर, तब्बू सहित फिल्म और खेल जगत की अनेक हस्तियाँ अंतिम दर्शन के लिए पहुँचीं।
संगीत का एक युग हुआ समाप्त
आशा भोसले ने आठ दशकों के अपने करियर में विभिन्न भाषाओं में 12,500 से अधिक गाने गाए। उन्होंने मीना कुमारी, माधुबाला और ज़ीनत अमान से लेकर काजोल और उर्मिला मातोंडकर जैसी अभिनेत्रियों को अपनी आवाज़ दी। उन्हें वर्ष 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें दो ग्रैमी नामांकन भी प्राप्त हुए।
राष्ट्रीय शोक और श्रद्धांजलियाँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “उनकी असाधारण संगीत यात्रा ने दशकों तक हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। उनकी आत्मीय धुनें और जीवंत रचनाएँ कालातीत प्रतिभा की साक्षी रहेंगी।” मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में IPL 2026 मैच से पहले एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई और दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने काली पट्टी बाँधकर मैदान पर उतरे। 8 सितंबर 1933 को सांगली में जन्मी आशा भोसले ने भारतीय संगीत को वह ऊँचाई दी, जिसे भुला पाना असंभव है। उनकी आवाज़ भले ही आज खामोश हो गई हो, लेकिन उनके गीत पीढ़ियों तक गूँजते रहेंगे।

