दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बीजेपी का ‘सियासी व्हीकल’: 14 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, तीन राज्यों में चुनावी हुंकार

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बीजेपी का ‘सियासी व्हीकल’: भाजपा ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (210 किमी एक्सप्रेसवे) को विकास के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति का बड़ा हथियार बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल 2026 (डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती) को इस एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन करने वाले हैं। इस मौके पर उत्तराखंड, पश्चिम उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भाजपा की सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी इसे 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों तथा दिल्ली में भविष्य की तैयारी के लिए इस्तेमाल कर रही है।

एक्सप्रेसवे की खासियतें

लंबाई: 210 किमी (6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे)

लागत: लगभग 12,000 करोड़ रुपये

यात्रा समय: दिल्ली से देहरादून की दूरी 6-7 घंटे से घटकर मात्र 2.5 घंटे

रूट: दिल्ली (अक्षरधाम) → बागपत → शामली → मुजफ्फरनगर → सहारनपुर → देहरादून

विशेष: राजाजी नेशनल पार्क से गुजरने वाला एशिया का सबसे लंबा 12 किमी एलीवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, 76 किमी सर्विस रोड, 29 किमी एलीवेटेड सेक्शन, 110 वाहन अंडरपास और हर 30 किमी पर रेस्ट एरिया| यह परियोजना पर्यटन, व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देगी। सहारनपुर जैसे पश्चिमी यूपी जिलों में भी विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।

भाजपा की तीन राज्यों वाली रणनीति

भाजपा थिंकटैंक इस एक्सप्रेसवे को “एक तीर से कई निशाने” साधने का माध्यम मान रही है:

उत्तराखंड (2027 चुनाव): पीएम मोदी देहरादून पहुंचकर डाट काली मंदिर में पूजा करेंगे, जनसभा को संबोधित करेंगे और गढ़ी कैंट में रोड शो करेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को पूरे समाज का उत्सव बनाने की तैयारी की है, जिसमें गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी संस्कृति की झलक दिखाई जाएगी। यह मिशन 2027 का चुनावी शंखनाद माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश (पश्चिमी यूपी): एक्सप्रेसवे वेस्ट यूपी के गाजियाबाद, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से होकर गुजरता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहारनपुर के गणेशपुर में जनसभा करेंगे और विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। 13 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में जयंत चौधरी (रालोद) के साथ मंच साझा करने की संभावना है। दलित वोटों को साधने के लिए एक्सप्रेसवे को अंबेडकर जयंती पर उद्घाटित करने की योजना है।

दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2030 में हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे के दिल्ली छोर पर आयोजन कर गाजियाबाद-नोएडा-बागपत क्षेत्र के मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। दिल्ली भाजपा प्रमुख रेखा गुप्ता इस दिशा में सक्रिय हैं।

भाजपा दलितों और सनातनी वोटरों को एक साथ साधने की कोशिश कर रही है। RSS की ‘एक कुआं-एक श्मशान’ वाली लाइन और बीएसपी की कमजोरी का फायदा उठाने की रणनीति साफ दिख रही है। साथ ही, संजीव बालियान और संगीत सोम जैसी नेताओं की मंच उपस्थिति पर भी नजरें टिकी हैं।

विकास vs सियासत

एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगा बल्कि पर्यटन, होटल व्यवसाय, स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देगा। पश्चिमी यूपी में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।

भाजपा इसे विकास मॉडल के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बता सकता है। सियासी जानकारों का मानना है कि मेरठ मेट्रो-रैपिड रेल, जेवर एयरपोर्ट और अब इस एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं भाजपा को 2027 के चुनावों में मजबूत स्थिति दिला सकती हैं। 14 अप्रैल का कार्यक्रम तीन राज्यों में भाजपा की ‘हुंकार’ का केंद्र बनेगा। आम जनता के लिए यह बेहतर कनेक्टिविटी का तोहफा है, जबकि राजनीतिक दलों के लिए यह रणनीतिक मौका।

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