मेट्रो प्रोजेक्ट को केंद्र का ‘रेड सिग्नल’: संशोधित डीपीआर खारिज, अब नई रिपोर्ट से शुरू होगी प्रक्रिया

मेट्रो प्रोजेक्ट को केंद्र का ‘रेड सिग्नल’: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों के लिए मेट्रो कनेक्टिविटी का सपना एक बार फिर टल गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) द्वारा भेजी गई संशोधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है। अब पूरे प्रोजेक्ट के लिए नई DPR तैयार करनी होगी, जिससे निर्माण कार्य में और देरी हो जाएगी।

डीपीआर खारिज होने का कारण

मूल DPR में सेक्टर-51 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक कुल 15 स्टेशन प्रस्तावित थे, जिसे उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी थी। लेकिन गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट RRTS (रैपिड रेल) परियोजना के कारण रूट में बदलाव किया गया और संशोधित DPR को केवल 5 स्टेशनों (सेक्टर-51 से ग्रेनो वेस्ट सेक्टर-4 तक) तक सीमित कर दिया गया। केंद्र सरकार ने इसे नियमों के खिलाफ माना क्योंकि पुरानी DPR के एक हिस्से को अलग करके नया प्रोजेक्ट नहीं भेजा जा सकता। मंत्रालय ने साफ कहा कि नई और स्वतंत्र DPR तैयार करनी होगी जिसमें पूरा 5 स्टेशनों वाला प्रोजेक्ट शामिल हो।

प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति

प्रस्तावित रूट: सेक्टर-51 (नोएडा) से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक लगभग 7.5 किलोमीटर। पहले चरण में 4-5 स्टेशन प्रस्तावित थे| लाखों फ्लैट खरीदारों और निवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब यह और लंबित हो गया है।

आगे क्या होगा?

नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को अब जीरो से नई DPR तैयार करनी होगी। इसके बाद:

  • तकनीकी जांच
  • उत्तर प्रदेश कैबिनेट से दोबारा मंजूरी
  • केंद्र सरकार को नया प्रस्ताव भेजना

इस पूरी प्रक्रिया में कई महीनों का समय लग सकता है। नोएडा अथॉरिटी और NMRC अधिकारियों ने कहा है कि जल्द ही नई रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

निवासियों की प्रतिक्रिया

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले निवासी इस देरी से काफी निराश हैं। क्षेत्र में आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं मिल पा रही। कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन पहले भी मेट्रो की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। यह फैसला एक बार फिर सवाल उठाता है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में केंद्र-राज्य समन्वय और तकनीकी मंजूरी की प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है।

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