इंजीनियर युवराज मेहता केस: पंकज सिंह के जल-उद्घाटनों के बीच गड्ढे और लिफ्ट की समस्याएं बरकरार,  सेक्टर-150 हादसे के बाद भी जान जा रही, भ्रष्टाचार की शिकायतें तेज

इंजीनियर युवराज मेहता केस: राजनाथ सिंह के पुत्र और नोएडा विधायक पंकज सिंह इन दिनों सड़क मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और पीने के पानी की सुविधाओं के उद्घाटन में व्यस्त दिख रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ये सब चुनावी चमक के लिए हो रहा है। असल समस्याएं खासकर गड्ढों में गिरने की घटनाएं, सोसाइटियों में लिफ्ट फेल होना और नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में फैला भ्रष्टाचार जस की तस बनी हुई हैं।

हालिया उद्घाटन और विकास कार्य

31 मार्च 2026 को पंकज सिंह ने सेक्टर-44 और छलेरा गांव में संप वेल (Sump Well) का उद्घाटन किया। इससे पहले नोएडा अथॉरिटी के साथ मिलकर पानी से जुड़ी कई छोटी-मोटी सुविधाएं शुरू की गईं। विधायक का कहना है कि क्षेत्र में जलभराव और सीवर की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो रही है। सेक्टर-62 में स्काईवॉक और ट्रैफिक लूप्स जैसे प्रोजेक्ट्स भी उनके प्रयासों से आगे बढ़ रहे हैं।

सेक्टर-150 में अभी भी गड्ढे मौत का सबब

जनवरी 2026 में सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार गहरे पानी भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। घने कोहरे में कार नाले की दीवार तोड़कर प्लॉट के गड्ढे में जा गिरी। पुलिस ने बिल्डरों पर लापरवाही का केस दर्ज किया और दो डेवलपर्स को गिरफ्तार भी किया। लेकिन तीन महीने बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। निवासियों का कहना है कि खुले गड्ढे, टूटी सड़कें और नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही अब भी बनी हुई है। कई जगहों पर रात में गड्ढे में गिरने की घटनाएं लगातार हो रही हैं।

सोसाइटियों में लिफ्ट की समस्या बढ़ी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हिमालय प्राइड सोसाइटी में 27-28 मार्च 2026 को भयानक हादसा हुआ। कन्या पूजन के लिए जा रही 10 बच्चियों और दो महिलाओं को लिफ्ट में लगभग एक घंटे तक फंसा रहना पड़ा। सिर्फ एक लिफ्ट काम कर रही थी, बाकी चार खराब। निवासियों ने बताया कि बिल्डर सोसाइटी का हैंडओवर टाल रहा है और रखरखाव पर ध्यान नहीं दे रहा। ऐसी घटनाएं अब आम हो गई हैं, लेकिन न तो अथॉरिटी और न ही स्थानीय विधायक इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान दे रहे हैं।

अथॉरिटी में भ्रष्टाचार का आरोप

नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर लंबे समय से भ्रष्टाचार और बिल्डरों से सांठगांठ के आरोप लग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी-बिल्डर नेटवर्क की जांच के लिए SIT गठित की है। मार्च 2026 में ही ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ, जहां FIR गायब होने और जांच रिपोर्ट लापता होने की बात सामने आई। पिछले सालों में भी अथॉरिटी अधिकारियों पर करोड़ों रुपये के गबन, अवैध मुआवजा और जमीन घोटाले के मामले सामने आए हैं।

निवासियों की नाराजगी

स्थानीय लोगों का कहना है, “विधायक जी चुनाव के समय सड़कें ठीक करवाते हैं, पानी एटीएम लगवाते हैं और फोटो खिंचवाते हैं, लेकिन रोजमर्रा की समस्याओं गड्ढे, लिफ्ट, सीवर और अथॉरिटी की लापरवाही पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा।” कई रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने अथॉरिटी और विधायक से लिखित शिकायतें भी की हैं, लेकिन कार्रवाई न के बराबर है। पंकज सिंह या नोएडा अथॉरिटी की ओर से इन ताजा शिकायतों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विधायक नियमित रूप से क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा करते रहते हैं। यह मुद्दा एक बार फिर सवाल उठाता है — क्या विकास सिर्फ उद्घाटन और फोटो-ऑप्स तक सीमित है, या असल बदलाव की जरूरत है? नोएडा-ग्रेटर नोएडा के लाखों निवासी अब स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

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