वैश्विक तेल संकट का असर: पश्चिम एशिया (ईरान युद्ध) में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आने से भारत में भी ईंधन से जुड़ी दो बड़ी कीमतों में बदलाव देखने को मिला है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आज 1 अप्रैल से एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ/जेट फ्यूल) की कीमतों में करीब 8.5% की बढ़ोतरी कर दी है, जबकि कमर्शियल एलपीजी के 19 किलो सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹195.50 बढ़ाकर ₹2,078.50 कर दी गई है।
सरकार ने घरेलू यात्रियों को कुछ राहत देने के लिए जेट फ्यूल की पूरी बढ़ोतरी को तुरंत पास नहीं करने का फैसला किया है। सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने राज्यों से एटीएफ पर वैट (वैट) घटाने की अपील की है, ताकि घरेलू उड़ानों के टिकट ज्यादा महंगे न हों।
जेट फ्यूल की स्थिति
वैश्विक स्तर पर: इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद जेट फ्यूल की कीमतें एक महीने में लगभग दोगुनी हो गई हैं। कुछ हफ्तों पहले $85-90 प्रति बैरल से बढ़कर $150-200 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। कुछ रिपोर्ट्स में तो 80-105% तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। भारत में मार्च में कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं, लेकिन 1 अप्रैल से ओएमसी (ऑयल मार्केटिंग कंपनियां) ने 8.5% की आंशिक बढ़ोतरी लागू की है। पूरी बढ़ोतरी पास करने पर एयरलाइंस की लागत में भारी उछाल आ सकता था, जिसमें फ्यूल पहले से ही 40% तक खर्च होता है—कुछ अनुमानों में यह 80% तक पहुंच सकता था। एयरलाइंस पहले से ही फ्यूल सरचार्ज लगा रही हैं। एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर जैसी कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ₹399 से शुरू होकर हजारों रुपये तक का अतिरिक्त चार्ज लगा चुकी हैं। सरकार की कोशिश है कि घरेलू हवाई यात्रा पर बोझ ज्यादा न पड़े, इसलिए आंशिक बढ़ोतरी और राज्यों से वैट में कटौती की मांग की जा रही है।
कमर्शियल एलपीजी पर बढ़ोतरी
दिल्ली में 19 किलो कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹195.50 बढ़कर ₹2,078.50 हो गई है। मुंबई में ₹2,031, कोलकाता में ₹2,208 और चेन्नई में ₹2,246 तक पहुंच गई। 5 किलो मिनी सिलेंडर पर भी ₹51 की बढ़ोतरी हुई है। यह इस महीने की दूसरी बढ़ोतरी है (पहली 1 मार्च को ₹114.50 की हुई थी)। घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो सिलेंडर) पर कोई बदलाव नहीं—दिल्ली में अभी भी ₹913 पर स्थिर है। दोनों बढ़ोतरी का मूल कारण एक ही है—वेस्ट एशिया में संघर्ष के चलते क्रूड ऑयल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित होना और क्रैक स्प्रेड (रिफाइनिंग मार्जिन) में भारी उछाल।
आम आदमी और कारोबार पर असर
हवाई यात्रा: गर्मियों की पीक सीजन में टिकट महंगे हो सकते हैं। हालांकि सरकार का आंशिक राहत वाला रुख घरेलू यात्रियों को कुछ संतोष दे सकता है।
होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबार: कमर्शियल एलपीजी महंगा होने से खाने-पीने के ठिकानों पर खर्च बढ़ेगा, जो अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी स्थिर हैं, जो आम जनता के लिए राहत की बात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव जारी रहा तो आने वाले महीनों में और दबाव बढ़ सकता है। सरकार एविएशन सेक्टर को सपोर्ट करने और आम उपभोक्ताओं को बचाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
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