गुलाबी हाथी फोटोशूट पर विवाद: रूसी फोटोग्राफर ने हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंगकर फोटोशूट किया, सोशल मीडिया पर भड़का विवाद; वन विभाग करेगा जांच

गुलाबी हाथी फोटोशूट पर विवाद: राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक रूसी ट्रैवलिंग आर्ट फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा के फोटोशूट को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने जयपुर के गुलाबी रंग से प्रेरित होकर एक हाथी को पूरे शरीर पर चमकीले गुलाबी रंग से रंगकर तस्वीरें लीं, जिसमें एक मॉडल हाथी पर बैठी दिख रही है। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों और वीडियो के वायरल होने के बाद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने वन्यजीवों के शोषण और सुरक्षा को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।

जूलिया बुरुलेवा (बार्सिलोना आधारित रूसी फोटोग्राफर) ने बताया कि उन्होंने जयपुर में लगभग 6 हफ्ते बिताए। पिंक सिटी के रंगों, वास्तुकला और सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रभावित होकर उन्होंने यह कॉन्सेप्ट तैयार किया। शूट एक परित्यक्त गणेश मंदिर (अबैंडन्ड टेम्पल) में किया गया, जहां हाथी को गुलाबी रंग में रंगा गया और मॉडल यशस्वी ने पोज दिया। फोटोग्राफर का दावा है कि उन्होंने ऑर्गेनिक और लोकल पेंट का इस्तेमाल किया, जो त्योहारों में भी उपयोग होता है और हाथी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

विवाद क्यों?

सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे पशु क्रूरता और वन्यजीव शोषण बताया। कई कमेंट्स में कहा गया कि “जानवर प्रॉप्स नहीं हैं”, “कला के नाम पर बेजुबान जानवर का इस्तेमाल गलत है” और “AI का इस्तेमाल क्यों नहीं किया?” कुछ यूजर्स ने इसे “डीपली अपसेटिंग” करार दिया। वहीं कुछ लोगों ने क्रिएटिविटी की तारीफ भी की, लेकिन बहुमत ने नैतिकता पर सवाल उठाए।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

विवाद बढ़ने के बाद राजस्थान वन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह देखा जाएगा कि क्या वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हुआ है। जांच में पेंट के प्रकार, हाथी की स्थिति और परमिशन संबंधी पहलुओं पर गौर किया जाएगा।

हाथी मालिक या संबंधित पक्षों से भी पूछताछ हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में हाथी ‘चंचल’ का जिक्र है, हालांकि एक रिपोर्ट में उसके फरवरी में निधन का दावा भी सामने आया है, जिसकी पुष्टि जांच में होगी। यह घटना जयपुर जैसे पर्यटन स्थलों में हाथियों के उपयोग, सांस्कृतिक प्रतीकों के आधुनिक इस्तेमाल और पशु कल्याण के बीच संतुलन की बहस को फिर से जगा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कला और क्रिएटिविटी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे वन्यजीवों की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए।

नोट: पशु क्रूरता के मामलों में जागरूकता जरूरी है। भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत ऐसे कार्यों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

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