New Delhi news राजधानी नई दिल्ली के चांदनी चौक स्थित कूचा महाजनी इलाके में सर्राफा कारोबारी के पास काम करने वाला एक कर्मचारी 54 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी से 27 लाख रुपये, सचिन उर्फ विकास से 2.5 लाख रुपये और पवन कुमार से 2 लाख रुपए, 8 लाख रुपये की जमा रसीदें और एक वैगन-आर कार भी बरामद किया है।
पुलिस पूछताछ में आरोपी की पहचान रूपेश कुमार (24), सचिन उर्फ विकास (24) और पवन कुमार (21) के रूप में हुई है। तीनों सोनिया विहार के रहने वाले हैं।
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने शनिवार को बताया कि कोतवाली थाना में 6 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता ने बताया था कि वह कूचा महाजनी में बुलियन ट्रेडर के तौर पर काम करता है और रूपेश नाम का युवक उसके यहां कर्मचारी था। उसका काम बाजार में भुगतान पहुंचाने और रकम लाने का था। पांच फरवरी की शाम करीब 6:45 बजे व्यापारी ने रूपेश को 54 लाख रुपये देकर बाजार में भुगतान करने के लिए भेजा था, लेकिन वह रकम लेकर फरार हो गया।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, 5 मार्च को पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) प्रवेश राठी को सूचना मिली कि चोरी की रकम बांटने के लिए कुछ बदमाश दिल्ली-एनसीआर में इकट्ठा होने वाले हैं। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर अरविंद कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई। बाद में सूचना मिली कि आरोपी रात करीब साढ़े नौ बजे खजूरी खास फ्लाईओवर के नीचे पहुंचेंगे। पुलिस टीम ने जाल बिछाया और मौके से पहुंचे दो आरोपियों रूपेश और सचिन उर्फ विकास को गिरफ्तार कर लिया। जबकि आरोपियों की निशानदेही पर तीसरे आरोपित पवन कुमार को सोनिया विहार से पकड़ा गया।
दोस्तों के कहने पर रचा था रकम हड़पने का षड्यंत्र
पुलिस पूछताछ में रूपेश ने बताया कि उसने सोनिया विहार में दसवीं तक पढ़ाई की है। आर्थिक तंगी के कारण वह पहले कश्मीरी गेट में मोटर पार्ट्स की दुकान पर काम करता था। बाद में वह कूचा महाजनी स्थित व्यापारी हरिओम खंडेलवाल की दुकान पर काम करने लगा, जहां वह अक्सर माल और पैसे लेने-देने का काम करता था।
उसने अपने दोस्तों विकास और पवन को बताया कि उसका मालिक उस पर बहुत भरोसा करता है और उसे अक्सर बड़ी रकम लेकर बाजार भेजता है। इसके बाद तीनों ने मिलकर योजना बनाई कि जब भी बड़ी रकम मिलेगी, वह पैसे लेकर फरार हो जाएगा और कुछ समय के लिए दिल्ली छोड़ देंगे। पांच फरवरी को जब मालिक ने उसे 54 लाख रुपये देकर चांदी खरीदने के लिए भेजा, तो उसने योजना के मुताबिक पैसे लेकर फरार हो गया।
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