Holi festival: नई दिल्ली। होली का त्योहार कुछ ही दिनों में आने वाला है। यह हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे हर साल देशभर में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। रंगों का यह पर्व जहां खुशियां, मेल-मिलाप और भाईचारे का संदेश देता है, वहीं जरा-सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी भी पड़ सकती है। खासकर त्वचा, सांस और खान-पान से जुड़ी एलर्जी के मामले होली के दौरान तेजी से बढ़ जाते हैं।
Holi festival:
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मिलने वाले सस्ते और मिलावटी रंगों में कई बार औद्योगिक रसायन, सीसा, क्रोमियम और कृत्रिम डाई मिली होती है, जो त्वचा और श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
एलर्जी आखिर होती क्यों है?
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. राजीव चौधरी बताते हैं कि एलर्जी तब होती है जब शरीर धूल, रसायनों या कुछ खाद्य पदार्थों पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करता है। इन तत्वों को ‘एलर्जेन’ कहा जाता है।
होली के दौरान हवा में उड़ने वाले रंगों के महीन कण नाक और फेफड़ों में जाकर एलर्जी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। वहीं त्वचा पर लंबे समय तक रंग लगे रहने से रैशेज, खुजली और सूजन की शिकायत आम है।
Holi festival: होली में होने वाली प्रमुख एलर्जी और उनके लक्षण
1. सांस की एलर्जी
- लगातार छींक आना
- नाक बहना या बंद होना
- गले में खराश
- आंखों में खुजली व पानी आना
- खांसी या सांस फूलना
डॉक्टरों के अनुसार, जिन्हें पहले से अस्थमा या एलर्जिक राइनाइटिस की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
2. त्वचा की एलर्जी
- त्वचा का लाल पड़ना
- खुजली वाले चकत्ते (रैशेज)
- जलन या सूजन
- छोटे-छोटे दाने निकलना
- कुछ मामलों में फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन
त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को पक्के रंगों से विशेष रूप से बचना चाहिए।
3. फूड एलर्जी
होली पर गुझिया, ठंडाई, नमकीन और अन्य मिठाइयों का चलन बढ़ जाता है। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद दूध, खोया, मेवे या कृत्रिम रंग कुछ लोगों में एलर्जी पैदा कर सकते हैं।
गंभीर लक्षणों में शामिल हैं:
- सांस लेने में कठिनाई
- चेहरे, होंठ या गले में सूजन
- उल्टी या दस्त
- चक्कर आना
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
आंखों और बालों पर भी पड़ता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार, रंगों के कण आंखों में जाने से कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना), जलन और लालिमा हो सकती है। बालों पर केमिकल रंग लगाने से रूखापन, डैंड्रफ और हेयर फॉल की समस्या बढ़ सकती है।
सेफ होली खेलने के खास टिप्स
✔ हर्बल रंगों का इस्तेमाल
नेचुरल या घर पर बने हर्बल रंगों का उपयोग करें। टेसू के फूल, हल्दी, चंदन या चुकंदर से बने रंग सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं।
✔ त्वचा और बालों की सुरक्षा
रंग खेलने से पहले शरीर और बालों पर नारियल तेल, सरसों तेल या मॉइस्चराइजर लगा लें। इससे रंग त्वचा में गहराई तक नहीं जाएगा।
✔ पूरे शरीर को ढकें
फुल स्लीव कपड़े, धूप का चश्मा और सिर पर कैप या दुपट्टा पहनें।
✔ पानी का सीमित उपयोग
ज्यादा गीले रंग और कीचड़ से बचें। इससे त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
✔ तुरंत स्नान करें
रंग खेलने के बाद हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन से स्नान करें। जोर से रगड़ने से त्वचा छिल सकती है।
✔ खुद से दवा न लें
एलर्जी होने पर इंटरनेट या घरेलू नुस्खों के आधार पर दवा न लें। डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
✔ इमरजेंसी दवाएं साथ रखें
अस्थमा या गंभीर एलर्जी के मरीज अपने इनहेलर, एंटीहिस्टामाइन या डॉक्टर द्वारा दी गई इमरजेंसी दवा अपने पास रखें।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास सावधानी
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। ऐसे में उन्हें तेज रंगों और धूल से दूर रखना चाहिए।
इम्युनिटी मजबूत रखना भी जरूरी
पौष्टिक आहार, हरी सब्जियां, मौसमी फल, पर्याप्त पानी और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। त्योहारों के दौरान ज्यादा तला-भुना और बासी भोजन खाने से बचना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
- सांस लेने में गंभीर तकलीफ
- तेज सूजन
- बार-बार उल्टी
- तेज बुखार
- त्वचा पर पस वाले घाव
ऐसी स्थिति में देरी करना खतरनाक हो सकता है।
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