April February’ in Kashmir: श्रीनगर में 21°C का सर्वकालिक रिकॉर्ड, बर्फहीन पहाड़ों ने मचाया जलवायु संकट का अलार्म

‘April February’ in Kashmir: जम्मू-कश्मीर इस समय अभूतपूर्व गर्मी की चपेट में है। फरवरी का महीना, जो आमतौर पर कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी का होता है, इस बार मध्य-अप्रैल जैसा महसूस हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, घाटी में तापमान सामान्य से 10-12 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। श्रीनगर में 21 फरवरी को अधिकतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो शहर का फरवरी का अब तक का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड है। इससे पहले 24 फरवरी 2016 को 20.6 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड था।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गर्मी सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि पूरे फरवरी 2026 को घाटी के इतिहास का सबसे गर्म महीना बना सकती है। क्वाजिगुंड में 21.2-21.5 डिग्री, पहलगाम में 17.6 डिग्री, कुपवाड़ा में 20.4 डिग्री, कोकेरनाग में 19.0 डिग्री और गुलमर्ग में 11.2-11.5 डिग्री सेल्सियस (नया फरवरी रिकॉर्ड) दर्ज किया गया। जम्मू शहर में 25.3 डिग्री, बनिहाल में 21.4 डिग्री और कटरा में 24.5 डिग्री तक तापमान पहुंचा। लद्दाख के लेह-कारगिल में 7 डिग्री और नुब्रा घाटी में 10.1 डिग्री रहा।

बर्फ की भारी कमी, 14,000 फीट तक बर्फरहित चोटियां
गुलमर्ग गोंडोला के दूसरे चरण (समुद्र तल से 14,000 फीट ऊपर) से रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां फरवरी में आमतौर पर 10-12 फीट बर्फ जमा होती थी, वहां अब बर्फ नाम को भी नहीं है। पूरे पश्चिमी हिमालय में नवंबर से फरवरी तक वर्षा/बर्फबारी में 50-85 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान से ऊंची चोटियों पर बर्फ तेजी से पिघल रही है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के भूवैज्ञानिक रियाज अहमद मीर ने चेतावनी दी कि कम बर्फबारी से ग्लेशियरों पर इंसुलेटिंग कवर कम हो रहा है, जिससे ग्लेशियर पहले पिघल रहे हैं। हिमालयी ग्लेशियरों ने 2025 तक 45 प्रतिशत क्षेत्र खो दिया है और यह प्रक्रिया तेज हो रही है।

ग्रीष्मकालीन जल संकट और पर्यटन पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार नदियों-नालों में फरवरी में ही सामान्य से ज्यादा पानी बह रहा है, लेकिन ग्लेशियरों में कम बर्फ जमा होने से मार्च-अप्रैल में पीक फ्लो जल्दी आ जाएगा और गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है। सिंचाई, जलविद्युत, भूजल रिचार्ज और पीने के पानी पर असर पड़ेगा। पर्यटन क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित है। गुलमर्ग और पहलगाम में स्की सीजन छोटा पड़ रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने केलो इंडिया विंटर गेम्स के उद्घाटन पर कहा कि अब आर्टिफिशियल स्नो की ओर बढ़ना होगा। भाजपा ने इसे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताया है, लेकिन खेल मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में यह आम हो चुका है।

कृषि पर खतरा
बादाम और सेब के पेड़ समय से पहले फूलने लगे हैं। अपर्याप्त ठंड (चिलिंग आवर्स) से सेब की फसल पर असर पड़ सकता है और फ्रॉस्ट से नुकसान का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम केंद्र श्रीनगर के निदेशक मुख़्तार अहमद ने कहा, “यह पिछले दशक का सबसे गर्म फरवरी है। जलवायु परिवर्तन के कारण हमारा सर्दी का मौसम अब सिर्फ 40 दिन के चिल्लई कलां तक सिमटकर रह गया है।” मौसम विभाग ने 28 फरवरी तक शुष्क मौसम का पूर्वानुमान दिया है। 27-28 फरवरी को कुछ जगहों पर हल्की बारिश/बर्फबारी संभव है, लेकिन तापमान में और 1-2 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। मार्च की शुरुआत में भी ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं।

वैश्विक संदर्भ
यह घटना हिमालय में ‘ऊंचाई-आधारित वार्मिंग’ का उदाहरण है, जहां पहाड़ समतल इलाकों से 1.5-2 गुना तेज गर्म हो रहे हैं। पूरे भारत में 27 शहरों में फरवरी के तापमान सामान्य से ज्यादा हैं। वैज्ञानिक सोनम लोटस ने इसे “ग्लेशियरों का जल्दी बूढ़ा होना” करार दिया। कश्मीर के लोग अब साफ तौर पर देख रहे हैं कि जलवायु संकट अब सिद्धांत नहीं, हकीकत बन चुका है। बर्फरहित पहाड़, रिकॉर्ड गर्मी और आने वाले जल संकट की आहट ने क्षेत्र को चेतावनी दी है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग पर काबू नहीं पाया गया तो हिमालय की यह ‘लाइफलाइन’ तेजी से सूखती चली जाएगी।

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