पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच में बटुकों के आरोप सही पाए जा रहे हैं। झूंसी पुलिस ने लोकेशन, कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज आदि जुटाए हैं। हरदोई में पीड़ित परिवारों के बयान भी दर्ज किए गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले बटुक कभी उनके गुरुकुल में आए ही नहीं—वे हरदोई के स्कूल के छात्र हैं और उनके मार्कशीट कोर्ट में जमा किए गए हैं। स्वामी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, जिस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। उन्होंने कहा, “झूठा केस है, सच्चाई सामने आएगी। निष्पक्ष जांच हो और जल्द फैसला हो।”
मठ की लग्जरी सुविधाओं और संपत्ति विवाद पर भूमिका द्विवेदी का खुलासा इस बीच वाराणसी के केदार घाट स्थित विद्या मठ (श्री विद्यापीठ) को लेकर लेखिका के चौंकाने वाले दावे भी सुर्खियों में हैं। 2022 में दो महीने मठ में रह चुकीं लेखिका ने अपनी किताब और हालिया बयानों में बताया कि पारंपरिक सादगी की जगह यहां लग्जरी माहौल है—एसी, महंगे एलईडी टीवी, महंगे कालीन, चमचमाते हॉल और ऊपरी स्तर पर स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं। उन्होंने ‘सीक्रेट गेट’ और ‘सीक्रेट रूम्स’ का जिक्र किया, जिनका पूरा कंट्रोल स्वामी की ‘सखी’ (एक महिला, जिन्हें ‘दिदी लोग’ का क्षेत्र कहा जाता है) के पास है। लिफ्ट से पहुंचने वाला यह क्षेत्र आम लोगों के लिए वर्जित है और सीसीटीवी से निगरानी होती है।
लेखिका का दावा है कि बटुकों (विद्यार्थियों) को बाहरी दुनिया और माता-पिता से मिलने की सीमित अनुमति थी। गरीब परिवारों के बच्चे भारी काम करते थे और उनके सामान की चोरी भी होती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शंकराचार्य बनने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने करीब 22 संपत्तियां खरीदीं, जो कथित तौर पर उनकी बहन, भांजे और बहनोई के नाम पर दर्ज हैं। स्वामी ने इन आरोपों को व्यक्तिगत द्वेष बताया। उनका कहना है कि भूमिका का परिवार पहले मठ से जुड़ा था और अब बदले की भावना से आरोप लगा रही हैं। उन्होंने बताया कि भूमिका महज एक महीना रुकी थीं।
पृष्ठभूमि और माघ मेला विवाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 2022 में गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य बने। हाल ही में माघ मेला 2026 के दौरान स्नान व्यवस्था, पालकी और शंकराचार्य पद को लेकर प्रशासन से उनका विवाद हुआ था। 18 जनवरी को संगम स्नान रोक दिए जाने पर उन्होंने धरना दिया और बाद में मेला छोड़ दिया। इस पर राजनीतिक बवाल भी हुआ। आशुतोष ब्रह्मचारी और अन्य ने इन आरोपों को मेला विवाद से जोड़कर देखा है, जबकि स्वामी इसे सनातन धर्म और अपनी छवि खराब करने की साजिश बता रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
मामला फिलहाल पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ी हुई है—कुछ लोग निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो कुछ स्वामी के समर्थन में खड़े हैं और इसे साजिश करार दे रहे हैं। धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता को लेकर समाज में चर्चा तेज हो गई है। स्वामी ने कहा है कि वे जांच का सामना करेंगे और भाग नहीं रहे।
यह विवाद सनातन परंपरा, मठों की जिम्मेदारी और आस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर उठा रहा है। आगे की जांच और अदालती सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

