Supreme Court cracks down on NCERT: CJI सूर्य कांत के 5 सख्त आदेश, क्लास 8 किताब पर पूर्ण बैन-जब्ती, कंटेम्प्ट नोटिस

Supreme Court cracks down on NCERT: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की नई क्लास 8 सोशल साइंस किताब में ‘ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार’ वाले विवादास्पद अध्याय को लेकर आज भारी सख्ती दिखाई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने सुओ मोटो मामले में 5 सख्त और समयबद्ध आदेश जारी किए। कोर्ट ने इसे “डीप-रूटेड, वेल-ऑर्केस्ट्रेटेड कॉन्स्पिरेसी” करार दिया और कहा, “ज्यूडिशियरी को बदनाम करने की किसी की हिम्मत नहीं चलेगी… हेड्स मस्ट रोल।”

विवाद क्या था?
NCERT की किताब “Exploring Society: India and Beyond” (Part-2) में ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ अध्याय में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार, केसों में देरी, जजों के खिलाफ शिकायतें आदि का जिक्र था। वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने 25 फरवरी को इसे उठाया। CJI ने तुरंत सुओ मोटो संज्ञान लिया और कहा, “मैं किसी को संस्था को बदनाम नहीं करने दूंगा… यह कैलकुलेटेड मूव लगता है।” NCERT ने 25 फरवरी को किताब वेबसाइट से हटा ली और प्रेस रिलीज जारी कर माफी मांगी। कहा, “फीडबैक स्वीकार है, 2026-27 सत्र के लिए अध्याय फिर लिखा जाएगा।” केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त माफी मांगी।

CJI सूर्य कांत के 5 सख्त आदेश
1. पूर्ण प्रतिबंध: किताब की कोई नई छपाई, पुनर्मुद्रण या डिजिटल प्रसारण बिल्कुल बंद। कोई भी शेयरिंग/डिस्ट्रीब्यूशन कोर्ट की अवज्ञा माना जाएगा।
2. तुरंत जब्ती: NCERT, केंद्र और सभी राज्य शिक्षा विभागों को निर्देश—स्कूलों, स्टोर, रिटेल आउटलेट्स में रखी सभी हार्ड/सॉफ्ट कॉपी तुरंत जब्त और सार्वजनिक पहुंच से हटाएं। NCERT डायरेक्टर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी।
3. पढ़ाई पर रोक: किताब के किसी भी रूप (फिजिकल या डिजिटल) से छात्रों को कोई पढ़ाई/निर्देश नहीं दिया जाएगा।
4. कंप्लायंस रिपोर्ट: सभी राज्यों के शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी 2 सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करें। NCERT डायरेक्टर स्कूलों में भेजी गई किताबों की जब्ती की रिपोर्ट भी दे।
5. नाम-मिनट्स और शो-कॉज नोटिस: NCERT डायरेक्टर को offending चैप्टर तैयार करने वाले सभी लेखकों/सदस्यों के नाम, क्रेडेंशियल्स और मीटिंग के मूल मिनट्स अगली सुनवाई में जमा करने होंगे। स्कूल एजुकेशन विभाग के सेक्रेटरी और NCERT डायरेक्टर को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट या अन्य कानून के तहत कार्रवाई क्यों न हो, इसका जवाब दें (शो-कॉज नोटिस)। CJI ने कहा, “NCERT का प्रेस रिलीज माफी नहीं है… हम देखेंगे कि पब्लिक रिग्रेट जेनुइन है या सिर्फ लीगल बचाव।”

आगे क्या?
अगली सुनवाई में रिपोर्ट और दस्तावेज पेश होंगे। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
यह फैसला शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम निर्माण में जवाबदेही पर नया मापदंड स्थापित कर रहा है। NCERT अभी तक कोई अतिरिक्त बयान नहीं दिया है।

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